नववर्ष

नवल प्रात की नवल रश्मियाँ,
लेकर आई हैं, संदेश नवल।
कर पुरातन का अंत,
भर लो जीवन में नवल उमंग।
बीती बातों को न करो स्मरण,
जीवन में अपने करो,
नई ऊर्जा का संचरण।
क्रोध, अहंकार, विद्वेष का कर अंत,
सबका जीवन ही हो जाय पावन।
नवल वर्ष में नवल प्रीत हो, नवल स्नेह हो,
करने को स्वागत नववर्ष का,
जन-जन में हो नवल उमंग,
मन निर्मल, तन निर्मल,
जीवन भी हो निर्मल।
नव वर्ष में, नव हृदय से,
करते हम अभिनंदन,
मंगलमय हो सबको नववर्ष।
                                           
रचयिता                                  
चंचला पाण्डेय,
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय मसीरपुर, 
विकास खण्ड-बिलरियागंज, 
जनपद-आज़मगढ़।

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