दादी माँ

सबसे प्यारी, सबसे न्यारी ये बूढ़ी शहजादी

है मेरे पापा की मैया  माँ मेरी प्यारी दादी|

लाड़ लड़ाती, मेरी अम्मा किस्से रोज सुनाती 

माँ पापा को डाँट डाँटकर मेरा साथ निभाती

मेरी दादी माँ ने दी है बचपन को आजादी 

है मेरे पापा की मैया माँ मेरी प्यारी दादी|

 हाथ पकड़कर दादी का मैं रोज घूमने जाती 

दादी के संग मैं बाजार से खेल खिलौने लाती

हम दोनों संग रहते हरदम गर्मी हो या सर्दी

है मेरे पापा की मैया माँ मेरी प्यारी दादी|

 कंघा करती मैं दादी के, चोटी रोज बनाती 

खुश हो जातीं दादी मेरी जब मैं तेल लगाती 

 बाल सफेद चमकते ऐसे जैसे चमके चाँदी

 है मेरे पापा की मैया माँ मेरी प्यारी दादी|

सबसे सुंदर दादी मेरी सबकी नजर उतारें

सबकी चिंता करतीं, दादी सब है उसके प्यारे 

सबसे प्यारी सबसे न्यारी यह बूढ़ी शहजादी

 है मेरे पापा की मैया माँ मेरी प्यारी दादी|

             

रचयिता                 
अर्चना आर्या,
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय रामपुर-1,
विकास खण्ड-सदर,
जनपद-मुजफ्फरनगर।


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