राजा राममोहन राय

जब-जब धर्म की हानि होती,
पाप ही बढ़ता जाए।।
तब-तब ले अवतार प्रभू,
कोई न कोई रुप में आए।।

जब भारत में घोर अंधेरा छाया था,
अज्ञान ने डेरा जमाया था।।
तब सहसा एक उजाला आया,
नाम राजा राममोहन राय का पाया।।

22 मई 1772 को राधानगर बंगाल खिलखिलाया,
ब्रह्म समाज का कर निर्माण,
भारत का हैं मान बढ़ाया,
युगों-युगों से नारी शिक्षा का,
बन्धन छुड़ाया।।

सतीप्रथा के खातिर लड़कर,
जगजननी माँ, बेटी, बहन, पुत्री का सम्मान दिलाया,
आधुनिक भारत के जन्मदाता का नाम पाया।।

पुर्नजागरण में लाकर अंग्रेजी शिक्षा,
नारी शिक्षा, सामाजिक कल्याण किया,
रुढ़िबध्दता का अन्त किया,
सबका जीवन खुशहाल किया।।

फिर 1833 में ये प्रकाशपुन्ज
परमात्मा में विलीन हुआ,
पर दे गया ऐसा उजाला,
जिसका फिर न अन्त हुआ।।

रचयिता
शालिनी सिंह,
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय जानकीपुर,
विकास खण्ड-सिराथू,
जनपद-कौशाम्बी।

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