अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस विशेषांक,33,डॉ गीता नौटियाल, उत्तराखंड

*👩🏻‍🏫अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस विशेषांक*

*मिशन शिक्षण संवाद परिवार उत्तराखंड की बहनों की संघर्ष और सफ़लता की कहानी*

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*👩‍👩‍👧‍👧महिला सशक्तिकरण- 33*
(दिनाँक- 06 अप्रैल 2019)
नाम -डाॅ0गीता नौटियाल
विद्यालय का नाम-रा0उ0प्रा0विद्यालय बैनोली
संकुल-तुनेटा
विकासखंड-जखोली
जनपद -रुद्रप्रयाग
उत्तराखंड

*सफलता एवं संघर्ष की कहानी :-*
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प्रथम नियुक्ति तिथि-1मार्च1995
मेरी प्रथम नियुक्ति अपने ही गाँव के विद्यालय प्राथमिक विद्यालय बैनोली भरदार में हुई।इससे पहले भी मैं शिक्षण को अपना ध्येय बना चुकी थी।लगभग छः बर्षों तक सरस्वती शिशु मंदिर में तथा 2 वर्ष एम0आर0चिल्ड्रन एकेडमी तिलवाड़ा में अध्यापन कार्य किया।
जब सरकारी सेवा में आई तब मैं अपने बच्चों को अपने साथ सरकारी विद्यालय में पढ़ने के लिए लाई।मेरा यह खुद पर विश्वास मेरे लिए मील का पत्थर साबित हुआ।मैं जिस भी क्षेत्र में रही वहाँ का कोई भी बच्चा प्राइवेट विद्यालयों में पढ़ने नहीं गया ।यदि पहले से  बच्चे प्राइवेट में जाते थे तो उनके माता - पिताजी ने भी विश्वास किया और बच्चों को सरकारी विद्यालय में पढ़ने भेजा।अभिभावकों का यह विश्वास मेरा मनोबल बढ़ाने  में
ऊर्जा प्रदान करता रहा।
धीरे -धीरे बच्चों का अपार प्रेम व श्रद्धाभाव मुझे उत्साहित करता रहा।मेरे छात्रों ने मुझे कई बार राज्य स्तर पर जाने का सुअवसर प्रदान किया।इन  छोटे से बच्चों का  उत्साह मुझे प्रेरित करता रहा।इसीलिए मैं अपना पथ- प्रदर्शक अपने छात्रों को ही मानती हूँ।
मुझे लगातार बच्चों से इतना प्रेम मिला कि मैंने किसी भी वर्ष अपने
आकस्मिक अवकाश  पूरे नहीं लिए होंगे। सम्भवतः 25 वर्ष की नौकरी में एक या दो बार ही ऐसी परिस्थिति आई कि मुझे अवकाश लेने पड़े हों। मेरा  ध्येय रहता है कि जितना भी संभव हो मैं प्रयास करूँगी।
बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए विद्यालय में हस्तशिल्प को भी प्राथमिकता दी जाती है।इससे छात्र तो लाभान्वित होते ही हैं बल्कि उनके अभिभावकों को भी लाभ मिलता है।
छात्रों के सर्वांगीण विकास के लिए विद्यालय में तो अनेकानेक प्रयास के अलावा घर पर भी पुस्तकालय व वाचनालय खोला गया है।जिससे जरूरतमंदों की मदद की जा सके।
आर्थिक रूप से यदि विद्यालय में मेरे द्वारा  जो भी कार्य किये जाते हैं वह मैं अपना कर्तव्य समझती हूँ।माँ सरस्वती  से मेरी प्रार्थना है कि मैं जब तक जिन्दा रहूँ शिक्षा की जोत जलाने में अपना योगदान देती रहूँ।
विषम परिस्थितियों में शिक्षा प्राप्त करके मुझे शिक्षक पद मिलना व देश के  महामहिम राष्ट्रपति के हाथों *राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार* प्राप्त  होना माँ सरस्वती का मुझको असीम आशीर्वाद मिला है।5सितम्बर2014को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कारऔर 4जुलाई2016में माँ नंदा देवी की कृपा से "माँ नंदा देवी सम्मान"मिला।मैं अपनी सफलता का श्रेय अपने विद्यार्थियों के साथ - 2माता-पिता को देना चाहूँगी।
जिन्होंने उस समय के ग्रामीण वातावरण में बेटी को शिक्षित करने का प्रयास किया।माता पिता को मेरा शत् शत् नमन।वर्तमान में विद्यालय के छात्रों की आरोग्यता की कामना हेतुमिशन शिक्षण संवाद से जुड़कर योगासन  कराने में प्रयासरत् हूँ।
*प्रेरक सन्देश*"कर्म की जीत है।"
मेरी प्रेरणा है।
यह वाक्य मुझे प्रेरित करता है।

_✏संकलन_
*📝टीम मिशन शिक्षण संवाद उत्तराखंड*

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