समोच्चारित भिन्नार्थक शब्द
उच्चारण में लगें समान, अतः समोच्चारित कहलाते।
अर्थ में होती है भिन्नता, अतः भिन्नार्थक बन जाते।।
अन्न का मतलब है अनाज, अन्य होता दूसरा।
कुल का मतलब वंश सारा, कूल होता किनारा।।
पत्ता होता पेड़ का, पता होता ठिकाना।
कोश मतलब शब्द भंडार, कोष कहलाता खजाना।
अचार होता आम इत्यादि का, आचार होता आचरण।।
अनु होता है बाद में, अणु कहलाता कण।।
अंक होता गोद, संख्या, अंग शरीर का भाग।
अनिल पर्याय हवा का, अनल होती है आग।।
समान होता है बराबर, सम्मान करना इज्जत।
मूल कहलाती जड़ सदा, मूल्य होता कीमत।।
नीर पर्याय जल का, नीड़ कहलाता घोंसला।
शाम कहते सांझ को, श्याम कहलाये काला।।
उपल होता पत्थर, उत्पल कहलाता शतदल।
नीरज पर्याय कमल का, नीरद होता बादल।।
ग्रह कहलाते आकाशीय पिंड, गृह हमारा घर।
घोड़े को कहते तुरंग, तरंग कहलाये लहर।।
उद्यत होता तैयार रहना, उद्धत होता उद्दंड।
चिर होता बहुत समय, चीर वस्त्र का खंड।।
प्रमाण बन जाता सबूत, परिमाण होता मात्रा।
प्रणाम करना होता नमस्कार, परिणाम बने नतीजा।।
तरणि मतलब सूर्य, तरणी होती नौका।
सूचि होती है सूई, सूची बने तालिका।
वात होती है हवा, बात करना वार्ता।
मात्र होता है केवल, मातृ होती माता।।
पानी पर्याय जल का, पाणि होता हाथ।
संघ कहलाता है समुदाय, संग होता साथ।।
लक्ष्य होता है उद्देश्य, लाख होता लक्ष।
वक्ष का मतलब छाती होता, पेड़ कहलाये वृक्ष।।
रचयिता
ऋतु सिंघल,
प्रधानाध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय अंबेहटा चांद-1,
विकास खण्ड- रामपुर मनिहारान,
जनपद- सहारनपुर।
अर्थ में होती है भिन्नता, अतः भिन्नार्थक बन जाते।।
अन्न का मतलब है अनाज, अन्य होता दूसरा।
कुल का मतलब वंश सारा, कूल होता किनारा।।
पत्ता होता पेड़ का, पता होता ठिकाना।
कोश मतलब शब्द भंडार, कोष कहलाता खजाना।
अचार होता आम इत्यादि का, आचार होता आचरण।।
अनु होता है बाद में, अणु कहलाता कण।।
अंक होता गोद, संख्या, अंग शरीर का भाग।
अनिल पर्याय हवा का, अनल होती है आग।।
समान होता है बराबर, सम्मान करना इज्जत।
मूल कहलाती जड़ सदा, मूल्य होता कीमत।।
नीर पर्याय जल का, नीड़ कहलाता घोंसला।
शाम कहते सांझ को, श्याम कहलाये काला।।
उपल होता पत्थर, उत्पल कहलाता शतदल।
नीरज पर्याय कमल का, नीरद होता बादल।।
ग्रह कहलाते आकाशीय पिंड, गृह हमारा घर।
घोड़े को कहते तुरंग, तरंग कहलाये लहर।।
उद्यत होता तैयार रहना, उद्धत होता उद्दंड।
चिर होता बहुत समय, चीर वस्त्र का खंड।।
प्रमाण बन जाता सबूत, परिमाण होता मात्रा।
प्रणाम करना होता नमस्कार, परिणाम बने नतीजा।।
तरणि मतलब सूर्य, तरणी होती नौका।
सूचि होती है सूई, सूची बने तालिका।
वात होती है हवा, बात करना वार्ता।
मात्र होता है केवल, मातृ होती माता।।
पानी पर्याय जल का, पाणि होता हाथ।
संघ कहलाता है समुदाय, संग होता साथ।।
लक्ष्य होता है उद्देश्य, लाख होता लक्ष।
वक्ष का मतलब छाती होता, पेड़ कहलाये वृक्ष।।
रचयिता
ऋतु सिंघल,
प्रधानाध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय अंबेहटा चांद-1,
विकास खण्ड- रामपुर मनिहारान,
जनपद- सहारनपुर।

उत्तम प्रयास
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