गणेश चतुर्थी

है हमारा प्रमुख यह त्योहार
गणपति आते हमारे द्वार।
भाद्रपद मास चतुर्थी शुक्ल पक्ष
मंगलमूर्ति का है अवतरण दिवस।

शिव क्रोध से जब शीश हुआ विलग
जान पार्वती पुत्र और आज्ञा पालक
गज मस्तक कराया पुत्र को धारण
मिला पुनर्जीवन कहलाये गजानन।

सभी देवताओं में हैं पूजनीय प्रथम
पूजन से होता मांगलिक कार्यों का शुभारंभ।
सौभाग्य, समृद्धि, ज्ञान के प्रतीक
विनायक, विघ्नहर्ता, रिद्धि सिद्धि के दाता।

आज के दिन होते स्थापित घर-घर
सारे विघ्नों कष्टों को हरते लम्बोदर।
लाल रंग, मोदक, पंचामृत होता अर्पित
ग्याहरवें दिन धूमधाम से होते विसर्जित।

हे गणपति! इस बरस कुछ ऐसे आना
प्रकृति को कष्ट दिए हैं हमने माना।
मानव की बुद्धि शुद्धि तुम कर जाना
हे प्रभु! धरती में खुशहाली तुम लाना।

"वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ
निर्विघ्नं कुरु में देव सर्वकार्येषु सदा....."

रचयिता 
मोनिका रावत मगरूर,
सहायक अध्यापक,
राजकीय प्राथमिक विद्यालय पैठाणी,
विकास खण्ड-थलीसैंण, 
जनपद-पौड़ी गढ़वाल,
उत्तराखण्ड।

Comments

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    1. तहे दिल से शुक्रिया मैम जी....🙏🙏💐💐

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  2. Replies
    1. बहुत बहुत आभार सर जी....🙏🙏💐💐

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