गणेश -वंदना
तर्ज-राधे कृष्ण की ज्योति अलौकिक
गणपति बप्पा की लीला देखो, सारी दुनिया गाय रही है,
आकर भोग लगाओ गजानन, मन में प्रीत जगाय रही है,
गौरी-नंदन को सब भक्त, घर में अपने बुलाय रहे हैं,
विनती करो स्वीकार बप्पा, जोगन आरती गाय रही है।।
1-एकदन्त, दयावन्त, गणपति, चार भुजा को धारण किये हो,
शंकर-गौरी के तुम प्यारे, जग को लीला दिखाय रहे हो,
कर-जोर प्रार्थना करके निहारें, आप हमारी प्रार्थना स्वीकारो,
घर में पधारो हमारे गजानन, कैलाश जैसा धाम विचारो।
गणपति बप्पा.......
2-मूषक राजा तुमरी सवारी, संत तुम्हारी सेवा किये है,
सर्वप्रथम हो पूजन तुम्हारा, सर्वकाज सिद्ध किये हैं,
रिद्धि-सिद्धि के सहित पधारो, भक्तिन आस लगाय रही है,
चरन पखारुँ, मंगल गाउँ, कैलाश जैसा धाम विचारो।
गणपति बप्पा......
गणपति बप्पा की लीला देखो, सारी दुनिया गाय रही है,
आकर भोग लगाओ गजानन, मन में प्रीत जगाय रही है,
गौरी-नंदन को सब भक्त, घर में अपने बुलाय रहे हैं,
विनती करो स्वीकार बप्पा, जोगन आरती गाय रही है।।
1-एकदन्त, दयावन्त, गणपति, चार भुजा को धारण किये हो,
शंकर-गौरी के तुम प्यारे, जग को लीला दिखाय रहे हो,
कर-जोर प्रार्थना करके निहारें, आप हमारी प्रार्थना स्वीकारो,
घर में पधारो हमारे गजानन, कैलाश जैसा धाम विचारो।
गणपति बप्पा.......
2-मूषक राजा तुमरी सवारी, संत तुम्हारी सेवा किये है,
सर्वप्रथम हो पूजन तुम्हारा, सर्वकाज सिद्ध किये हैं,
रिद्धि-सिद्धि के सहित पधारो, भक्तिन आस लगाय रही है,
चरन पखारुँ, मंगल गाउँ, कैलाश जैसा धाम विचारो।
गणपति बप्पा......
रचयिता
नम्रता श्रीवास्तव,
प्रधानाध्यापिका,
प्राथमिक विद्यालय बड़ेह स्योढ़ा,
विकास खण्ड-महुआ,

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