माँ की जुबानी, सब्जी की कहानी

बच्चों तुमको क्या खाना है,
मुझको जल्दी बतलाना है।
सब्जी वाला करेला लाया,
फिर भी तुमको यह ना भाया।
    भिंडी देखो हरी -भरी है,
    फिर भी घर में पड़ी हुई है।
    लौकी तोरई बेल पर आए,
    फिर भी मन को कभी ना भाये।
 बैंगन बोले मेरा राज,
 मुझको तुम बना लो आज।
 सारी सब्जी स्वास्थ्य बनाएँ,
 बोलो अब हम किसे पकाएँ।
   मम्मी हमको सब्जी नहीं खाना,
   पिज्जा, बर्गर, चाऊमीन बनाना।
   हमको इनमें स्वाद हैं आते,
   इसीलिए हम सब्जी नहीं खाते।

रचयिता
नीलम सिंह, 
सहायक अध्यापक,
उच्च प्राथमिक विद्यालय रतनगढ़ी,
विकास खण्ड व जनपद-हाथरस।

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