गणेश वन्दना
सकल देवों में प्रथम पूज्य हो
गौरी सुत, गणपति, गणेश हो
वक्रतुण्ड हो, एकदन्त हो,
विद्यादायक तुम अनन्त हो।
लम्बोदर, मूषक सवारी,
भक्त जनों के संकट हारी।
तीन लोक में महिमा न्यारी,
विघ्न विनाशक मंगलकारी।
कृपा सिन्धु हे बुद्धि विधाता,
मोदक तुमको है अति भाता।
सिद्धि सदन, गजवदन विनायक,
कष्ट निवारक सब सुखदायक।
मन मन्दिर में आय विराजो,
सकल काज सबके तुम साधो
जय जय जय हे गौरी नन्दन,
बारम्बार तुम्हारा वन्दन।।
रचयिता
निशी श्रीवास्तव,
प्रधानाध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय रमपुरवा,
विकास खण्ड-बी0के0टी0,
जनपद-लखनऊ।
गौरी सुत, गणपति, गणेश हो
वक्रतुण्ड हो, एकदन्त हो,
विद्यादायक तुम अनन्त हो।
लम्बोदर, मूषक सवारी,
भक्त जनों के संकट हारी।
तीन लोक में महिमा न्यारी,
विघ्न विनाशक मंगलकारी।
कृपा सिन्धु हे बुद्धि विधाता,
मोदक तुमको है अति भाता।
सिद्धि सदन, गजवदन विनायक,
कष्ट निवारक सब सुखदायक।
मन मन्दिर में आय विराजो,
सकल काज सबके तुम साधो
जय जय जय हे गौरी नन्दन,
बारम्बार तुम्हारा वन्दन।।
रचयिता
निशी श्रीवास्तव,
प्रधानाध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय रमपुरवा,
विकास खण्ड-बी0के0टी0,
जनपद-लखनऊ।

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