सुहानी वर्षा

मौसम वर्षा का आया रे,
शीतलता संग में लाया रे।
मस्त मयूर जंगल में नाचे,
सूरज चाचू डर कर भागे।
मस्त हवा ठंडी सी बहती,
कानों में चुपके से कहती।
बन्द करो सब पंखे कूलर,
ए. सी. को  दे दो  विदाई।
शुद्ध हवा में साँस लो भाई,
वर्षा  की  मस्त ऋतु आई।
हरा भया धरती का आंचल,
नदियाँ बहती  हैं  निश्छल।
खिली-खिली है धरती माता,
श्रृंगार धरा का मन को भाता।
जगह-जगह तुम वृक्ष लगाओ,
माँ धरती का आँगन  स‌जाओ।।
अहसान बहुत हैं इसके तुम पर,
कुछ तो इसका कर्ज चुकाओ।।

रचयिता
नीलम कौर,
सहायक अध्यापिका,
प्राथमिक विद्यालय शाहबाजपुर,
विकास खण्ड-सिकन्दराबाद,
जनपद-बुलंदशहर।

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