रक्षाबंधन बना वृक्षबंधन

आज राखी का त्योहार आया।
देश के कोने-कोने में खुशियाँ लाया।
हर जवान की कलाई आगे लाया।
हर भाई के लिए बहन लाया।
रक्षाबंधन का त्योहार आया।
युवा शक्ति से समाज में बदलाव आया।
बहनों की दृढ़ शक्ति को समझ पाया।
मानव प्रकृति के बीच संबंध गहराया।
प्रकृति बचाने का संकल्प लाया।
पर्यावरण संरक्षण से संबंध जोड़ पाया।
रक्षाबंधन वर्षा कालीन त्यौहार लाया।
पर्यावरण को रक्षाबंधन का सूत्र पहनाया।
बरगद का पेड़ दीर्घायु का प्रतीक लाया।
प्रकृति का सौंदर्य मुस्कुराया।
वृक्ष बंधन से प्रकृति जीवन आनंद लाया।
राहगीर पशु चरवाहा बैठा पेड़ की छाया।
पर्यावरण प्रहरी के रूप में गाँव-गाँव आया।
भाई बहन के लिए खुशियाँ लाया।
भाई-बहन के मन में एक नया विचार आया।
राखी के त्योहार में बदलाव आया।

रचयिता
सुनीता मैन्दोलिया,
सहायक अध्यापक,
राजकीय प्राथमिक विद्यालय धीमरखेडा नवीन,
विकास खण्ड-काशीपुर,
जनपद-उधम सिंह नगर,
उत्तराखण्ड।

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