मेरा देश
हरा-भरा है मेरा देश,
सुखद, मनोरम प्यारा देश
धरा यहाँ की बहुत पवित्र,
सब धर्मावलम्बी मेरे मित्र।।
एक समान हैं सारे धर्म,
हम सब करते अच्छे कर्म।
होली, ईद, दशहरा, दीवाली
मिलजुल कर आती खुशहाली
याद है बचपन और स्कूल,
वो गलियाँ और उड़ती धूल
जिन वीरों ने दिया बलिदान
आओ याद में गाएँ गान।
यहाँ के मोमिन, ग़ालिब मीर,
यहीं है पुरखों की जागीर।
सुबह सलोनी प्यारी शाम,
सबके दिल में सबके राम।
धर्म कई पर हम सब एक
रंग, रूप, भाषाएँ अनेक।।
तुलसीदास और संतकबीर,
जायसी जैसे पीर फ़क़ीर।
यहाँ के कृष्ण यहाँ के राम,
बहुत पवित्र हैं चारों धाम।
सबसे महान है हिंदुस्तान,
बंग्लादेश न पाकिस्तान।
जान से प्यारा हिंदुस्तान,
यही है अपनी सबकी शान
सुखद, मनोरम प्यारा देश
धरा यहाँ की बहुत पवित्र,
सब धर्मावलम्बी मेरे मित्र।।
एक समान हैं सारे धर्म,
हम सब करते अच्छे कर्म।
होली, ईद, दशहरा, दीवाली
मिलजुल कर आती खुशहाली
याद है बचपन और स्कूल,
वो गलियाँ और उड़ती धूल
जिन वीरों ने दिया बलिदान
आओ याद में गाएँ गान।
यहाँ के मोमिन, ग़ालिब मीर,
यहीं है पुरखों की जागीर।
सुबह सलोनी प्यारी शाम,
सबके दिल में सबके राम।
धर्म कई पर हम सब एक
रंग, रूप, भाषाएँ अनेक।।
तुलसीदास और संतकबीर,
जायसी जैसे पीर फ़क़ीर।
यहाँ के कृष्ण यहाँ के राम,
बहुत पवित्र हैं चारों धाम।
सबसे महान है हिंदुस्तान,
बंग्लादेश न पाकिस्तान।
जान से प्यारा हिंदुस्तान,
यही है अपनी सबकी शान
रचयिता
आसिया फ़ारूक़ी,
प्रधानाध्यापिका,
प्राथमिक विद्यालय अस्ती,
नगर क्षेत्र-फतेहपुर,

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