कन्या भ्रूण की पुकार

जोड़कर हाथ कर रही है कन्या भ्रूण पुकार
माँ मुझसे मत छीन तू जीने का अधिकार।
माँ अपना सम्मान कर मैं भी पाऊँ सम्मान
बन करके मैं कल्पना, छुऊंगी आसमान।
भाई जैसा जन्म दे, कर राखी सम्मान
जग में जो भी है अभी, नारी का अपमान।

तुम हो मेरी माँ महान, अपनी शक्ति पहचान
अबला भी हूँ भूल जा, खोलकर अपने कान।
दुर्गा का भी रूप हूँ, यह भी तू पहचान
लड़का लड़की दोनों ही, माँ के एक समान।
लड़का लड़की दोनो को, अवसर मिले समान।

लड़ो लड़ाई अपने हक़ की समाज को दो नई पहचान
सोच बदलो जन-जन की, रखना है सबको यह ध्यान।
बेटा बेटी शिक्षित कर, समाज को दो यह पहचान
इस माँ की ही शक्ति से बदलेगा सारा हिंदुस्तान।

रचयिता
सुनीता मैन्दोलिया,
सहायक अध्यापक,
राजकीय प्राथमिक विद्यालय धीमरखेडा नवीन,
विकास खण्ड-काशीपुर,
जनपद-उधम सिंह नगर,
उत्तराखण्ड।

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