पर्यावरण
कक्षा - प्राथमिक /उच्च प्राथमिक
विषय – पर्यावरण
तर्ज – तुझे सूरज कहूँ या चंदा, तुझे दीप कहूँ या तारा...
उठ जाग कुटिल मानव तू, मत काटे जंगल सारा।
ये साँस हवा से आए, जीवन चल रहा हमारा।।
निज स्वारथ में मानव जल, वन नष्ट न कर यह नारा।
प्राकृतिक कोप का भाजन, न बन जाए विश्व दोबारा।।
दुर्लभ ये वन जल पर्वत, प्रकृति में मिलें न दुबारा।
ये साँस हवा से आए, जीवन चल रहा हमारा।।....
बीजों को हमने बोया या वो खुद बिखर गए थे।
माँ धरती के आँचल में, मिट्टी में वो सो रहे थे।।
नित हवा खाद पानी ने, सूरज संग मिल सहलाया।
अंकुर फूटा देखा तो, मानव का दिल हरषाया।।....
ऊपर बढ़ आया प्रांकुर, मूलांकुर बड़ता नीचे।
प्रांकुर से तना मूलांकर, पौधे की जड़ बन सींचे।
सूरज से मिलती नित हैं, किरणें बढ़ने का सहारा,
पत्तियों ने भोजन संचित कर, भागों में भेजा सारा।।....
रचयिता
श्रीमती नैमिष शर्मा,
सहायक अध्यापक,
परि0 संविलियत पूर्व माध्यमिक विद्यालय तेहरा,
विकास खण्ड-मथुरा,
जनपद-मथुरा।
विषय – पर्यावरण
तर्ज – तुझे सूरज कहूँ या चंदा, तुझे दीप कहूँ या तारा...
उठ जाग कुटिल मानव तू, मत काटे जंगल सारा।
ये साँस हवा से आए, जीवन चल रहा हमारा।।
निज स्वारथ में मानव जल, वन नष्ट न कर यह नारा।
प्राकृतिक कोप का भाजन, न बन जाए विश्व दोबारा।।
दुर्लभ ये वन जल पर्वत, प्रकृति में मिलें न दुबारा।
ये साँस हवा से आए, जीवन चल रहा हमारा।।....
बीजों को हमने बोया या वो खुद बिखर गए थे।
माँ धरती के आँचल में, मिट्टी में वो सो रहे थे।।
नित हवा खाद पानी ने, सूरज संग मिल सहलाया।
अंकुर फूटा देखा तो, मानव का दिल हरषाया।।....
ऊपर बढ़ आया प्रांकुर, मूलांकुर बड़ता नीचे।
प्रांकुर से तना मूलांकर, पौधे की जड़ बन सींचे।
सूरज से मिलती नित हैं, किरणें बढ़ने का सहारा,
पत्तियों ने भोजन संचित कर, भागों में भेजा सारा।।....
रचयिता
श्रीमती नैमिष शर्मा,
सहायक अध्यापक,
परि0 संविलियत पूर्व माध्यमिक विद्यालय तेहरा,
विकास खण्ड-मथुरा,
जनपद-मथुरा।

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