मेरा मित्र

हर रिश्ता निभाता है,
सुख दुख में काम आता है,
मेरे मन की बातें सारी,
बिन बोले ही समझ जाता है।

सबसे सुंदर, सबसे प्यारा,
सबसे अच्छा मेरा मित्र।

अपनी सारी चीजें प्यारी,
दे देता मुझको हर बारी,
कभी न करें मुझसे इनकार,
समर्पण के लिए हरदम तैयार। 

ऐसा है यह मेरा मित्र

दीदी रूठी, भैया रूठे,
रूठे चाहे सारा परिवार,
लेकिन न रूठे यह भैया,
ऐसा सच्चा मेरा मित्र।

दुख मुझको हो वह रो जाए,
चोट लगे मुझे दर्द वो पाए,
आँखों की भाषा हो जाने,
अंतर्द्वंद को  वो पहचाने।

ऐसा सच्चा मेरा मित्र।

जब होता है उसका साथ,
शत्रु खा जाते हैं मात।
मेरे लिए तत्पर हरदम,
ऐसा सक्षम मेरा मित्र।

सबसे सुंदर, सबसे प्यारा,
सबसे अच्छा मेरा मित्र।

रचयिता
नौरीन सआदत,
सहायक अध्यापक,
पूर्व माध्यमिक विद्यालय रिसौरा,
विकास खण्ड-महुआ,
जनपद-बाँदा।

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