शत-शत नमन

वो लोग अजब मस्ताने थे,
आजादी के दीवाने थे
न परवाह अपनी जान की थी
धुन माटी के सम्मान की थी
मातृभूमि के कर्ज चुकाने थे
आजादी के दीवाने थे
लाठी, डंडे, गोली खाई
और कई दफा वो जेल गए
दुश्मन को सबक सिखाने थे
आजादी के दीवाने थे
आजादी के सपने के लिए
वो जान पर अपने खेल गये
फिरंगी के शीश झुकाने थे
आजादी के दीवाने थे
उनकी कुर्बानी देकर ही
हमने आजादी पाई है
शत-शत नमन उनको वीरों को
आजादी के परवानों को
मस्तानों को दीवानों को

रचयिता
शालिनी शर्मा,
सहायक अध्यापक,
राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय छापुर,
विकास खण्ड-भगवानपुर,
जनपद-हरिद्वार,
उत्तराखण्ड।

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