छोटू कान्हा

गोपियाँ मुझको छेड़-छेड़कर,
माखन-माखन कहती हैं।
माखन लेने जाता हूँ तो,
खूब आनन्द लेती हैं।।

गोल मुझको नचा-नचाकर,
ता-ता थैया कहती हैं।
जब मैं नाचन मना करूँ तो,
झट तुझसे आकर कहती हैं।।

माखन खुद ही देकर के,
मुझे माखनचोर कहती हैं।
बता माई अब तू ही बता,
मेरी गलती कहाँ पर होती है?

कान्हा की भोली बातें सुनकर,
यशोदा मईया कहती हैं।
न न मेरे भोले कन्हाई,
ये बाला नटखट होती है।।

रचयिता
आयुषी अग्रवाल,
सहायक अध्यापक,
कम्पोजिट विद्यालय शेखूपुर खास,
विकास खण्ड-कुन्दरकी,
जनपद-मुरादाबाद।

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