स्वतन्त्रता दिवस

बन्धनयुक्त जीवन क्या है
पिंजड़े का पंछी इसका गवाह,
आजाद परिन्दा क्या जाने
गुलामी की दास्तां।

गुलाम हुआ जब देश हमारा
अंग्रेजों के शासन से,
कष्टकारी था जीवन बहुत
ब्रिटिश हुकूमत के जुल्मों से।

देश को आजाद कराने का
हर देशवासी ने प्रण लिया,
1857 के आगाज ने
आजादी का बिगुल बजा दिया।

सत्य अहिंसक पुजारी बनकर
गांधीजी ने जन्म लिया,
आजाद हिंद का गठन कर
सुभाष ने सपना साकार किया।

बिस्मिल, अशफाक सरीखे
इस देश मे पैदा हुए हैं वीर,
आजाद व भगत सिंह ने
दुश्मन को था डाला चीर।

धन्य है भारत भूमि
धन्य वीरपुत्रों का बलिदान,
स्वतन्त्रता के पावन पर्व पर
शहीदों को शत- शत प्रणाम।

रचयिता
मंजू गुसांईं,
सहायक अध्यापक,
राजकीय आवासीय प्राथमिक विद्यालय थराली,
विकास खण्ड-थराली,
जनपद-चमोली,
उत्तराखण्ड।

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