टोकरी में क्या है
कक्षा -4
टोकरी में क्या है?
(पाठ काव्यरूप में परिवर्तित)
नानी-नानी जा रही हूँ मैं अपने घर,
अच्छा बिटिया रक्खो फिर टोकरी सर।
टोकरी में क्या है? पहले ये बताओ,
जानो बूझो खुद ही पता तुम लगाओ।
अच्छा यह बताओ फिर मिठाई है या फल?
नानी - मिठाई नहीं इसमें हैं फल।
अच्छा-अच्छा तो फिर सेब ही होंगे,
नानी - सेब नहीं और कोई फल।
इसका फिर बताओ पेड़ छोटा या बड़ा?
नानी - छोटा नहीं यह तो होता है बड़ा।
अच्छा-अच्छा तो फिर नारंगी ही होगी,
नानी- नारंगी नहीं और कोई फल।
अच्छा फिर बताओ ये पीला है या लाल?
नानी - लाल नहीं यह तो है पीला।
अच्छा-अच्छा फिर तो ये आम ही होगा।
नानी- आम नहीं और कोई फल।
अच्छा फिर बताओ ये गोल है या लंबा?
नानी- लंबा नहीं यह तो है गोल।
अच्छा-अच्छा फिर ये अमरुद ही होगा।
नानी- अमरूद नहीं और कोई फल।
अच्छा फिर बताओ ये मीठा है या खट्टा?
नानी- मीठा नहीं यह तो है खट्टा।
अच्छा फिर तो इसमें माल्टा ही होगा।
नानी - माल्टा नहीं और कोई फल।
अच्छा फिर बताओ ये किस काम आता?
नानी- इससे बनता अचार और शरबत।
अच्छा नानी, अच्छा नानी जान गई मैं,
कौन सा फल है यह पहचान गई मैं।
यह तो है.................. 🍈
रचयिता
राजवीर सिंह 'तरंग',
प्रधानाध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय सिलहरी,
विकास क्षेत्र-सिलहरी,
जनपद-बदायूँ।
टोकरी में क्या है?
(पाठ काव्यरूप में परिवर्तित)
नानी-नानी जा रही हूँ मैं अपने घर,
अच्छा बिटिया रक्खो फिर टोकरी सर।
टोकरी में क्या है? पहले ये बताओ,
जानो बूझो खुद ही पता तुम लगाओ।
अच्छा यह बताओ फिर मिठाई है या फल?
नानी - मिठाई नहीं इसमें हैं फल।
अच्छा-अच्छा तो फिर सेब ही होंगे,
नानी - सेब नहीं और कोई फल।
इसका फिर बताओ पेड़ छोटा या बड़ा?
नानी - छोटा नहीं यह तो होता है बड़ा।
अच्छा-अच्छा तो फिर नारंगी ही होगी,
नानी- नारंगी नहीं और कोई फल।
अच्छा फिर बताओ ये पीला है या लाल?
नानी - लाल नहीं यह तो है पीला।
अच्छा-अच्छा फिर तो ये आम ही होगा।
नानी- आम नहीं और कोई फल।
अच्छा फिर बताओ ये गोल है या लंबा?
नानी- लंबा नहीं यह तो है गोल।
अच्छा-अच्छा फिर ये अमरुद ही होगा।
नानी- अमरूद नहीं और कोई फल।
अच्छा फिर बताओ ये मीठा है या खट्टा?
नानी- मीठा नहीं यह तो है खट्टा।
अच्छा फिर तो इसमें माल्टा ही होगा।
नानी - माल्टा नहीं और कोई फल।
अच्छा फिर बताओ ये किस काम आता?
नानी- इससे बनता अचार और शरबत।
अच्छा नानी, अच्छा नानी जान गई मैं,
कौन सा फल है यह पहचान गई मैं।
यह तो है.................. 🍈
रचयिता
राजवीर सिंह 'तरंग',
प्रधानाध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय सिलहरी,
विकास क्षेत्र-सिलहरी,
जनपद-बदायूँ।

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