जय भारत, जय तिरंगा

आजादी उम्मीद थी जिनकी
आजादी ही दीद थी जिनकी
प्रथम नमन उनको हूँ करती
फिर नमन जान से प्रिय तिरंगे को हूँ करती
संदेश आजादी का ए धरा के लालों तुमको हूँ देती:

उत्तम उत्तरोतर है करना
आलस नहीं कदापि करना
आजादी के फूल जिन्होंने
खून से अपने सींचे थे
उन फूलों की महक तुम
सदा दिल में अपने रखना

जल पर, नभ पर और जमीं पर
राज तुम्हें है करना
परचम ये तिरंगा हमारा
हर क्षेत्र में  है फहराना

पथ के कंटक सब साफ हों
आसान हर भारतवासी की राह हो
नित नवीन प्रयास इस दिशा में करना
राह सरल कर जाना, जिस राह तुम चलना।

सुगंध से महके जग हमारे चमन की
प्रतिष्ठा हो चहुँओर हमारे वतन की
प्रयास नित नूतन तुम करना
हार को जीत में परिणित तुम करना।

बहकें नहीं कदम तुम्हारे कहीं
सधे लक्ष्य की ओर तुम्हें है चलना
निरंतर समुचित प्रयास से है,
तुम्हे हर लक्ष्य भेद जाना।

रचयिता
गायत्री पांडे,
सहायक अध्यापक,
राजकीय प्राथमिक विद्यालय संजयनगर 1,
विकास खण्ड-रुद्रपुर,
जनपद-उधम सिंह नगर,
उत्तराखण्ड।

Comments

  1. संदेश देती बेहतरीन कविता

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