मस्तक तिलक चंदन करें

ओढ़ केसरिया कफन, धरती में वो जो सो गये।
माँ भारती को आजाद करने का जो अंकुर बो गये।
आज उन रणबांकुरों का सभी अभिनंदन करें।
मस्तक तिलक चंदन करें और हम वंदन करें।

देश की खातिर जिन्होंने, डगर कुर्बानी चुनी।
आजाद हो माँ भारती, को राह बलिदानी चुनी।
आज उन सेनानियों को याद कर दृग नम करें।
मस्तक तिलक चंदन करें और हम वंदन करें।

देश को अर्पित जिन्होंने, दीप देहरी कर दिया।
दे दिया सिंदूर अपना और उफ तक न किया।
त्याग की उन मूर्तियों के, पद पृक्षालन करें
मस्तक तिलक चंदन करें और हम वंदन करें।

आज हम आजाद हैं, पर याद यह मन में रहे।
देश हित सर्वोच्च है, यह भान आजीवन रहे।
जो मिले गद्दार उनका, मान हम मर्दन करें
वीर उन रणबांकुरों का, सभी अभिनंदन करें।
मस्तक तिलक चंदन करें और हम वंदन करें।

करें प्रण अवनीश संग सब, देश की रक्षा करेंगे।
शीश भी देना पड़ा तो, निडर हो अर्पित करेंगे।
देश हित में हम सभी मिल, आज यह चिंतन करें।
मस्तक तिलक चंदन करें और हम वंदन करें।

रचयिता
अवनीश कुमार गंगवार,
सहायक अध्यापक,
राजकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय सतुईया,  
विकास क्षेत्र- रुद्रपुर, 
जनपद- ऊधम सिंह नगर,
जनपद-उत्तराखण्ड।

Comments

Post a Comment

Total Pageviews