राखी के धागे
प्यार भरा, स्नेह भरा है;
भाई के अनुरागों में।
रक्षा का दायित्व भरा है,
राखी के इन धागों में।।
सावन, झूले, गाँव, बगीचे,
गीत, मल्हारों, रागों में।
प्यारा बचपन छुपा हुआ है,
राखी के इन धागों में।।
निर्भय होके जिये निर्भया,
नहीं रहे भय, ख्वाबों में।
हो एसी निर्भीक, निडरता,
भरी हुई इन धागों में।।
पावन प्यार बहिन भाई का,
बँटे कभी ना भागों में।
वो पावनता भरी हुई है,
राखी के इन धागों में।।
रचयिता
रविकान्त शर्मा "मधुर",
एआरपी,
विकास खण्ड-जलेसर,
जनपद-एटा।
भाई के अनुरागों में।
रक्षा का दायित्व भरा है,
राखी के इन धागों में।।
सावन, झूले, गाँव, बगीचे,
गीत, मल्हारों, रागों में।
प्यारा बचपन छुपा हुआ है,
राखी के इन धागों में।।
निर्भय होके जिये निर्भया,
नहीं रहे भय, ख्वाबों में।
हो एसी निर्भीक, निडरता,
भरी हुई इन धागों में।।
पावन प्यार बहिन भाई का,
बँटे कभी ना भागों में।
वो पावनता भरी हुई है,
राखी के इन धागों में।।
रचयिता
रविकान्त शर्मा "मधुर",
एआरपी,
विकास खण्ड-जलेसर,
जनपद-एटा।

Comments
Post a Comment