सूना विद्यालय
न घंटी की टन टन
न बच्चों का कलरव
न पहली बेंच की लड़ाई
न गलत जवाब पर खिंचाई
कॉपी पर स्टार की फरमाइश
एक चांस और खेलने की गुज़ारिश
बिना इन नटखट अदाओं के
समय काटना ही मुश्किल है.....
बिना सितारों के कहकशां,
बिना फूलों की फुलवारी
बिना साज के संगीत सी,
सूनी पड़ी विद्यालय की क्यारी
न प्रार्थना की गुनगुन
न छुट्टी की हलचल
बिना इस शोरगुल
समय काटना है मुश्किल.....
रचयिता
मृदुला सिंह,
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय गम्भीरपुर कछार,
विकास खण्ड-कल्याणपुर,
जनपद-कानपुर नगर।
न बच्चों का कलरव
न पहली बेंच की लड़ाई
न गलत जवाब पर खिंचाई
कॉपी पर स्टार की फरमाइश
एक चांस और खेलने की गुज़ारिश
बिना इन नटखट अदाओं के
समय काटना ही मुश्किल है.....
बिना सितारों के कहकशां,
बिना फूलों की फुलवारी
बिना साज के संगीत सी,
सूनी पड़ी विद्यालय की क्यारी
न प्रार्थना की गुनगुन
न छुट्टी की हलचल
बिना इस शोरगुल
समय काटना है मुश्किल.....
रचयिता
मृदुला सिंह,
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय गम्भीरपुर कछार,
विकास खण्ड-कल्याणपुर,
जनपद-कानपुर नगर।

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