मोहन मेरे आओ रे

हाकिल छन्द

मोहन  मेरे  आओ  रे
दुख सारे निपटाओ रे
मुरली अधरन लाओ रे
वंशी  तान  सुनाओ  रे।।

मधुवन  तुमको  याद करे
यमुना कल कल नाद करे
वंशी वट  मत बिसराओ
केशों को मत बिखराओ।।

सूना सा वो निधिवन है
यशुदा का भी आँगन है
सूनी गोकुल  गलियाँ हैं
मुरझायी सी कलियाँ हैं।।

गोकुल छोड़  गये जबसे
खुशियाँ रूठ गयीं तबसे
गुमसुम  राधा प्यारी  है
दुखिया हर  नर नारी है।।

माया ने फिर घेरा है
अंधकार का डेरा है
बंधन मन  के  मेरे हैं
शरणागत हम तेरे हैं।।

हे प्रभु फिर से आ जाओ
विश्वरूप फिर दिखलाओ
पापी सर  पर  बोल रहा
विष की परतें खोल रहा।।

दुष्टों का प्रभु दमन करो
हर पापी का शमन करो
वसुधा  का  उद्धार  करो
आओ फिर अवतार धरो।।

रचयिता
गुंजन शुक्ला, 
प्रधानाध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय गणेशपार्क,
विकास खण्ड-औरैया,
जनपद -औरैया।

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