फिर विद्यालय के द्वार खुलेंगे
यह घड़ी विपदा की मुश्किल,
सब्र करो टल जाएगी।
फिर विद्यालय के द्वार खुलेंगे,
आँगन में खुशियाँ आएँगी।।
होंगे बच्चे कुछ नए नवेले,
कुछ दोस्त पुराने साथी से।
कुछ राधा हमसे पूछेगी,
कुछ हम बतियाएँगे मोहन से।
डाँटेंगे, डपटेंगे थोड़ा सा,
थोड़ा फिर प्यार दुलारेंगे।
यह समय जो बीता बिना मिले,
उसके किस्से दोहराएँगे।
सर जी, सर जी मैडम- मैडम के,
कानों में सुर फिर गूँजेंगे।
इतने दिन के जब बाद मिलेंगे,
हम पुलकित होकर झूमेंगे।
फिर घंटी की तान बजेगी,
किचन महकेगा खुशबू से।
फिर कक्षा में बोर्ड लगेगा,
धूल उड़ेगी डस्टर से।
हम तुम कुछ दिन नहीं मिले जो,
ये दिन लगते हैं बरसों से।
स्कूलों के द्वार खुलें अब,
हम फिर मिल पाएँ बच्चों से।
हम फिर मिल पाएँ बच्चों से ,
यह घड़ी बड़ी विपदा की मुश्किल।
सब्र करो टल जाएगी,
फिर विद्यालय के द्वार खुलेंगे।
आँगन में खुशियाँ आएँगी।
आँगन में खुशियाँ आएँगी।
रचयिता
हरीश नौटियाल,
सहायक अध्यापक,
राजकीय आवसीय प्राथमिक विद्यालय कोटधार(गमरी),
विकास खण्ड-चिन्यालीसौड़,
जनपद-उत्तरकाशी,
उत्तराखण्ड।
सब्र करो टल जाएगी।
फिर विद्यालय के द्वार खुलेंगे,
आँगन में खुशियाँ आएँगी।।
होंगे बच्चे कुछ नए नवेले,
कुछ दोस्त पुराने साथी से।
कुछ राधा हमसे पूछेगी,
कुछ हम बतियाएँगे मोहन से।
डाँटेंगे, डपटेंगे थोड़ा सा,
थोड़ा फिर प्यार दुलारेंगे।
यह समय जो बीता बिना मिले,
उसके किस्से दोहराएँगे।
सर जी, सर जी मैडम- मैडम के,
कानों में सुर फिर गूँजेंगे।
इतने दिन के जब बाद मिलेंगे,
हम पुलकित होकर झूमेंगे।
फिर घंटी की तान बजेगी,
किचन महकेगा खुशबू से।
फिर कक्षा में बोर्ड लगेगा,
धूल उड़ेगी डस्टर से।
हम तुम कुछ दिन नहीं मिले जो,
ये दिन लगते हैं बरसों से।
स्कूलों के द्वार खुलें अब,
हम फिर मिल पाएँ बच्चों से।
हम फिर मिल पाएँ बच्चों से ,
यह घड़ी बड़ी विपदा की मुश्किल।
सब्र करो टल जाएगी,
फिर विद्यालय के द्वार खुलेंगे।
आँगन में खुशियाँ आएँगी।
आँगन में खुशियाँ आएँगी।
रचयिता
हरीश नौटियाल,
सहायक अध्यापक,
राजकीय आवसीय प्राथमिक विद्यालय कोटधार(गमरी),
विकास खण्ड-चिन्यालीसौड़,
जनपद-उत्तरकाशी,
उत्तराखण्ड।

बहुत सुन्दर रचना
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