रंग-बिरंगा मोर

काली घटा जब उमड़के आए
पंख खोलकर नाच दिखाए।

सिर पर अपने ताज सजाता
रंग-बिरंगे पंख नचाता।

पैर देख वो हुआ उदास
बोला कौआ आया पास।

मेरा भी तन काला है
इससे क्या होने वाला है।

मन को सुन्दर रखना प्यारे
खुशी के राज इसी में सारे।

रचयिता
आयुषी अग्रवाल,
सहायक अध्यापक,
कम्पोजिट विद्यालय शेखूपुर खास,
विकास खण्ड-कुन्दरकी,
जनपद-मुरादाबाद।

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