हमें आजादी चाहिए

हमें आजादी चाहिए!
अपने अन्दर के कामचोर से
जो केवल दिखावे को बाहर आता है
हमें आजादी चाहिए!
अपने अन्दर के असभ्यपन से
जो अकेले में बाहर आता है
हमें आजादी चाहिए!
अपने अन्दर के अशिक्षित से
जो पढ़कर भी नहीं समझता है
हमें आजादी चाहिए!
अपने अन्दर के उस शैतान से
घर के बाहर ही बाहर निकलता है
हमें आजादी चाहिए!
अपने अन्दर के परजीवी से
जो अकर्मण्य सब खाना चाहता है
हमें आजादी चाहिए!
अपने अन्दर के बहरेपन से
जो सुनकर भी कुछ नहीं करता है
हमें आजादी चाहिए!
हमें आजादी चाहिए।

रचयिता
रमेश चंद्र जोशी(सत्यम जोशी),
सहायक अध्यापक, 
रा0 प्रा0 वि0 बैकोट,
विकास खण्ड - धारचूला,
जनपद - पिथौरागढ़,
उत्तराखण्ड।

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