कृष्णा तुम्हारी याद आती है
जब भी कोई मुरली की मधुर धुन बजाता है,
नटखट अदाओं से गोपियों को रिझाता है।
जब भी माखन चुराने की बात आती है,
कृष्णा तुम्हारी बहुत याद आती है।।
अन्याय जब भी बढ़ता जाता है,
अधर्म हर तरफ अपना पाँव फैलाता है।
जब भी ईश्वर के अवतार लेने की बात आती है,
कृष्णा तुम्हारी बहुत याद आती है।।
आज हर तरफ पाप बढ़ता जाता है,
हर जगह एक दुर्योधन सिर उठाता है।
जब भी अत्याचार मिटाने की बात आती है,
कृष्णा तुम्हारी बहुत याद आती है।।
आज का अर्जुन अपना धर्म भुलाता है,
युधिष्ठिर धर्म की राह पर चल नहीं पाता है।
अब जब किसी द्रौपदी की लाज बचाने की बात आती है,
कृष्णा तुम्हारी बहुत याद आती है।।
रचयिता
अंजली मिश्रा,
सहायक शिक्षिका,
प्राथमिक विद्यालय टिकरा,
विकास खण्ड-देवमई,
जनपद-फतेहपुर।
नटखट अदाओं से गोपियों को रिझाता है।
जब भी माखन चुराने की बात आती है,
कृष्णा तुम्हारी बहुत याद आती है।।
अन्याय जब भी बढ़ता जाता है,
अधर्म हर तरफ अपना पाँव फैलाता है।
जब भी ईश्वर के अवतार लेने की बात आती है,
कृष्णा तुम्हारी बहुत याद आती है।।
आज हर तरफ पाप बढ़ता जाता है,
हर जगह एक दुर्योधन सिर उठाता है।
जब भी अत्याचार मिटाने की बात आती है,
कृष्णा तुम्हारी बहुत याद आती है।।
आज का अर्जुन अपना धर्म भुलाता है,
युधिष्ठिर धर्म की राह पर चल नहीं पाता है।
अब जब किसी द्रौपदी की लाज बचाने की बात आती है,
कृष्णा तुम्हारी बहुत याद आती है।।
रचयिता
अंजली मिश्रा,
सहायक शिक्षिका,
प्राथमिक विद्यालय टिकरा,
विकास खण्ड-देवमई,
जनपद-फतेहपुर।

Comments
Post a Comment