रक्षाबन्धन पर नया विचार

चलो इस बार एक नई रीत चलाएँ,
राखी पर कुछ नया करके दिखाएँ।
जिस  घर  में  दो -दो  हैं  बहनें,
वो एक-दूसरे की रक्षा करके दिखाएँ,
छोटी बाँधे बड़ी को बड़ी बाँधे छोटी को,
दोनों आपस में राखी कलाई पर सजाएँ,
आओ मिलकर के खुशियाँ मनाएँ।
चलो इस बार एक नई रीत चलाएँ,
राखी पर कुछ नया करके दिखाएँ।
जिस  घर  मे  दो-दो  हैं  भाई,
वो आपस में रक्षा का बन्धन बनाएँ,
छोटा बाँधे बडे़ को बड़ा बाँधे छोटे को,
दोनों साथ-साथ खुशियाँ मनाएँ,
हम सभी का मनोबल बढ़ाएँ।
चलो इस बार एक नयी रीत चलाएँ,
राखी पर कुछ नया करके दिखाएँ,
जिस घर में इकलौती  है बहना,
वो हरपल खुशी से ही रहना,
एक सुंदर सी राखी तुम ले आना,
अपने प्यारे पौधे को राखी से सजाना,
उस पौधे की रक्षा का वचन  निभाना।
चलो इस बार एक नई रीत चलाएँ,
 राखी पर कुछ नया करके दिखाएँ।
     
रचयिता
हरमिन्दर कौर,
सहायक अध्यापक,
राजकीय प्राथमिक विद्यालय ढकिया नं.1,
विकास खण्ड-काशीपुर,
जनपद-ऊधम सिंह नगर।

Comments

  1. बहुत ही सुंदर विचार है।वाकई आपने कई कदम आगे बढ़ कर सोचा है।💐💐💐💐

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  2. धन्यवाद मैम👌👌👌🙏🙏🙏

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