बाल मन की चाह

तितली के दोनों पंखों को, रंग बिरंगा कर दूँ।
इन्द्रधनुष के सातों रंग मैं, आसमान में भर दूँ।

कॉपी, पेन्सिल और किताब को, घर पर ही मैं रख दूँ।
बिस्कुट, टॉफी, चॉकलेट से, बस्ते को मैं भर दूँ।

नील गगन में तारों के संग, चन्दा बनकर चमकूँ।
कर दूँ इतना नाम मैं ऊँचा, सूरज जैसा दमकूँ ।

परियों जैसे पंख पहनकर, उनमें मोती जड़ दूँ।
गुब्बारों में हवा को भर के, सैर सपाटे कर लूँ।

खेलूँ, कूदूँ, नाचूँ, गाउँ, खूब तमाशे कर लूँ।
कभी-कभी मम्मी जो कह दे, थोड़ा सा मैं पढ़ लूँ।

तितली के दोनों पंखों को, रंग बिरंगा कर दूँ।
इन्द्रधनुष के सातों रंग मैं, आसमान में भर दूँ।

रचयिता
सीमा नौटियाल, 
सहायक अध्यापक,
राजकीय प्राथमिक विद्यालय गाड़ी,
विकास खण्ड-दशोली,
जनपद-चमोली,
उत्तराखण्ड।

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