आहुति
बड़ा विकट और अस्त-व्यस्त था,
सारा सिस्टम बना हुआ।
कोई मस्त और कोई त्रस्त था,
था अचरज से सब भरा हुआ।।
कर्मशील न झुका कभी,
और न आगे कभी झुकेगा भी।
चाहे कोई विधा ले आएँ,
न उसका काम रुकेगा कभी।।
जो परिवर्तन से बचते हैं,
आज शिकन है माथे पर।
गुरुओं का परिपूर्ण ही होना,
स्वस्थ नींव है वसुधा पर।।
जहाँ डर और भय की छाया,
वहाँ रोष सदा पनपता है।
जो अपने में ही उलझ रहा,
क्या आकार गढ़ सकता है।।
आओ स्वीकारें नव रचना,
जिस पर हमको चलना है।
दुनिया को दे सकें दिशा जो,
उस प्रकल्प से जुड़ना है।।
हाँ थोड़ी कठिनाई आएगी,
पर आराम अधिक होगा।
जैसा मन में रहा नहीं कुछ,
वैसा काम भी अब होगा।।
तेजी से बदलाव चल रहा,
उसके साक्षी बनें सभी।
अपनी आहुति करें समर्पित,
नवाचार मिल करें सभी।।
अपनी आहुति.........
......................सभी।।।।
रचयिता
कृष्ण कुमार अक्षज,
प्रधानाध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय रामपुर की मड़ैया,
विकास खण्ड-भाग्यनगर,
जनपद-औरैया।
सारा सिस्टम बना हुआ।
कोई मस्त और कोई त्रस्त था,
था अचरज से सब भरा हुआ।।
कर्मशील न झुका कभी,
और न आगे कभी झुकेगा भी।
चाहे कोई विधा ले आएँ,
न उसका काम रुकेगा कभी।।
जो परिवर्तन से बचते हैं,
आज शिकन है माथे पर।
गुरुओं का परिपूर्ण ही होना,
स्वस्थ नींव है वसुधा पर।।
जहाँ डर और भय की छाया,
वहाँ रोष सदा पनपता है।
जो अपने में ही उलझ रहा,
क्या आकार गढ़ सकता है।।
आओ स्वीकारें नव रचना,
जिस पर हमको चलना है।
दुनिया को दे सकें दिशा जो,
उस प्रकल्प से जुड़ना है।।
हाँ थोड़ी कठिनाई आएगी,
पर आराम अधिक होगा।
जैसा मन में रहा नहीं कुछ,
वैसा काम भी अब होगा।।
तेजी से बदलाव चल रहा,
उसके साक्षी बनें सभी।
अपनी आहुति करें समर्पित,
नवाचार मिल करें सभी।।
अपनी आहुति.........
......................सभी।।।।
रचयिता
कृष्ण कुमार अक्षज,
प्रधानाध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय रामपुर की मड़ैया,
विकास खण्ड-भाग्यनगर,
जनपद-औरैया।

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