पर्यायवाची काव्य रूप में भाग-2

अबला, महिला, स्त्री, कामिनी, औरत, नारी के नाम,
बिना किसी को कष्ट दिए, जो करती घर के काम।
दूर देश में दूर-दूर तक, हमने घूमा जग सारा,
तारक, तारिका, नक्षत्र, नरवत, कहलाएँ सब तारा।
जलज, पंकज, नीरज, वारिद, अंबुज, राजीव, सरोज,
कमल के नाम हैं ये सभी, करो न इनमें भेद।
कोयल, श्यामा, वसंतदूत, पिक, परमृत हैं नाम,
कू-कू गाए कोकिला, रोज सुबह और शाम।
मोहन, केशव, गिरिधर, माधव, गोपाल और मुरारी,
जानो कृष्ण के नामों को, ये विष्णु के अवतारी।
सुत, तनय, पुत्र, आत्मज, तनुज बेटे को हम हैं कहते,
सुता, तनया, पुत्री, आत्मजा, तनुजा बेटी को कहते।
सुहृद, भीत, सहचर, सखा, दोस्त, मित्र के नाम,
पड़े कभी भी बुरा वक्त, आवैं ये ही काम।
तपिश थी इतनी धरा पर, वे जल को बरसाने लगे,
घन, मेघ, नीरद, अंबुद, जलधर, बादल कहलाने लगे।
चिराग, दीया, प्रदीप, गृहमणि, दीपक, दीप के नाम,
करे उजाला जब जले, अद्भुत इसका काम।
सूर्यतनया, सूर्यसुता, कालिन्दी, यमुना,
रवितनया, रविनंदिनी को कहते जमुना।
खग, विहग, नभचर, परिन्दा, आसमान में उड़ते,
पतंग, अंडज, पक्षी भी, हम इन्हीं को कहते।
         
रचयिता
अरविन्द कुमार सिंह,
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय धवकलगंज, 
विकास खण्ड-बड़ागाँव,
जनपद-वाराणसी।

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