जय मिशन शिक्षण संवाद
बना योग व अभ्यास का गढ़,
मिशन शिक्षण संवाद पिथौरागढ़।
जहाँ नित नवीन आसन ज्ञान हैं पाते,
गुरुजन रोज विद्यालय में सिखाते।।
कभी पालथी मार सीधे बैठकर,
कहीं खड़े, तिरछे, ऊकड़ू होकर।
तरह-तरह से चलता साँसों का क्रम,
मिट जाता मन से रोगों का भ्रम।।
जो बच्चे रोज योग हैं करते,
मन लगा वो पाठशाला में पढ़ते।
जीवन शान्त और आनन्दमय,
आनन्दालय हो गये हमारे स्कूल।।
लगता है रोज खुला रहे विद्यालय,
नीरस लगता अपना निज आलय।
भोजन, वस्त्र, पढ़ाई है सब मुफ्त,
नहीं अब शिक्षक पहले जैसे सख्त।।
मैत्री पूर्ण अब उनका व्यवहार,
होती हमारे मन की ही हर बार।
अहा! धन्य हम स्वर्ण युग में पैदा हुए,
असल आजादी तो भारत में बच्चे ही पाए।।
हमारी सेवा ही शासन का असली काम है।
दैनिक सूचनाओं से शिक्षक हैरान है।
गिरीश पाठक सर सहित पूरे ग्रूप को शत-शत नमन,
"मिशन शिक्षण संवाद" चालू रहे, यही हमारा कथन।।
रचयिता
दीवान सिंह कठायत,
प्रधानाध्यापक,
रा० आ० प्रा० वि० उडियारी,
विकास खण्ड- बेरीनाग,
जनपद- पिथौरागढ़,
उत्तराखण्ड।

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