महिला सशक्तीकरण विशेषांक-334
*👩👩👧👧महिला सशक्तीकरण विशेषांक-334*
*मिशन शिक्षण संवाद परिवार की बहनों की संघर्ष और सफ़लता की कहानी*
(दिनाँक- 27/06/2025)
नाम:- *ममता गंगवार*
पद:- *इंचार्ज प्रधानाध्यापक*
विद्यालय :- *कंपोजिट विद्यालय बरहा, ललौरीखेड़ा, पीलीभीत*
*सफलता एवं संघर्ष की कहानी :-*👇
★प्रथम नियुक्ति/सामाजिक सेवा की शुरुआत *1999*
★वर्तमान नियुक्ति/वर्तमान कार्यक्षेत्र
*2004, कंपोजिट विद्यालय बरहा, ब्लॉक -ललौरीखेड़ा, ज़िला -पीलीभीत*
★ *प्रारम्भिक परिचय*
मेरी शैक्षिक योग्यता बीएससी बायोलॉजी, एमए अर्थशास्त्र, एमएड है। मैंने इस सेवा में आने से पूर्व में एक प्राइवेट विद्यालय में 4 वर्ष शिक्षण कार्य किया था। इस सेवा में आने के बाद प्राथमिक से उच्च प्राथमिक विद्यालय में मेरा विज्ञान अध्यापिका हेतु चयन हुआ। वहां सहायक अध्यापक के पद पर सेवा देते हुए वर्तमान में मैं इंचार्ज प्रधानाध्यापिका के पद पर कार्य कर रही हूं। मेरे विद्यालय में वर्तमान में 700 बच्चे हैं तथा 14 शिक्षक शिक्षिकाएं तीन अनुदेशक हैं। मेरे विद्यालय में 14 कक्षा कक्ष, लाइब्रेरी कम कंप्यूटर कक्ष, खेल कक्ष, विज्ञान प्रयोगशाला, क्राफ्ट गैलरी हैं। हमारे विद्यालय का अपना घोष भी है।
मेरे विद्यालय के दो भूतपूर्व शिक्षकों को राज्य अध्यापक पुरस्कार, वर्तमान में राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त एक , राज्य अध्यापक पुरस्कार प्राप्त दो , तथा मुख्यमंत्री पुरस्कार से पुरस्कृत एक शिक्षिका हैं। हमारे विद्यालय की यह विशेषता है कि सभी अपने पुरस्कार से प्राप्त धनराशि को विद्यालय के विकास कार्य हेतु दान कर देते हैं
★विद्यालय/जीवन की समस्यायें एवं समाधान
समस्या 1:- मैं विद्यालय में विज्ञान टीएलएम के साथ ही शिक्षा कार्य करती थी। तो उसमें यह समस्या आती थी कि मेरा सामान कहीं और अलमारी में रखा होता था और मैं वहां से निकाल कर तीनों कक्षाओं में ले लेकर सामान जाती थी। जिसमें कई बार कुछ सामान भूलने पर मैं पढ़ाते पढ़ाते बीच में कक्षा में से जाकर सामान लेकर आती थी, कुछ कांच का सामान टूट भी जाता था। मैं बहुत सोचती थी ,काश ! एक विज्ञान प्रयोगशाला होती क्योंकि मैं जब प्राइवेट विद्यालय में शिक्षण कार्य करती थी तो वहां विज्ञान प्रयोगशाला में ही शिक्षण कार्य करती थी।
*समाधान*
इसके समाधान हेतु जब मुझे 2017 में राष्ट्रपति अवार्ड की ₹50000 की धनराशि प्राप्त हुई। तो मैंने विद्यालय के एक अतिरिक्त कक्ष को विज्ञान प्रयोगशाला का रूप दे दिया और वहीं शिक्षण कार्य करने लगी ।
*समस्या 2 - प्रतिभा पलायन*
वैसे तो विद्यालय में बच्चों की संख्या ठीक थी परंतु आसपास के सरकारी प्राथमिक विद्यालयों के बच्चे जो पढ़ने में अच्छे होते थे वह मेरे उच्च प्राथमिक विद्यालय में ना आकर माध्यमिक कॉलेज में प्रवेश ले लेते थे।
*समाधान:* मैंने पहले उन विद्यालय के शिक्षकों से ऐसे बच्चों की सूची प्राप्त कर फोन नंबर लेकर उनसे संपर्क किया और उन्हें कहा कि बस एक बार हमारे विद्यालय आकर देख लें, चाहे वह प्रवेश लें अथवा ना लें। और इस तरह से वह बच्चे पहली बार विद्यालय आते थे। और मैं विज्ञान को TLM एवं जादू की गतिविधियों के साथ पढ़ाती थी। किताब में जो भी प्रयोग होते थे ।उनको बच्चों को करके दिखाती थी और बच्चों से भी करवाती थी। जो भी बच्चा एक बार मेरे विद्यालय में आया फिर उसने कभी वापस किसी दूसरे विद्यालय में प्रवेश नहीं लिया। इस प्रकार हमारे विद्यालय में प्रतिभावान बच्चे आने लगे और हमारे विद्यालय का नामांकन बढ़ने लगा।
*समस्या 3 : विद्यालय में समय सारणी के अनुसार घंटी लगवाना*
विद्यालय में अनुचर की व्यवस्था न होने के कारण एक कलांश समाप्त हो जाने पर घंटी लगवाना बड़ा मुश्किल कार्य हो रहा था। कभी मैं इतनी व्यस्त होती थी कि घंटी लगवाना भूल जाती थी। कभी कक्षा में शिक्षक बड़े मानोयोग से पढ़ा रहे होते थे और मैं उसमें से एक बच्चे को बुलाकर बोलती हूं कि घंटी लगा दो। जो कि मुझे अच्छा नहीं लगता था।
*समाधान*
इसके समाधान हेतु मैंने अपने ऑफिस में इलेक्ट्रिक बेल लगवाई है और उसका कनेक्शन सभी कक्षाओं से है। मैं ऑफिस में बैठे-बैठे ही समय होने पर बटन दबा देती हूं और सभी कक्षा में बेल बज जाती है।
*समस्या 4* *विद्यालय के मैदान की इंटरलॉकिंग ना होना*
पूर्व में विद्यालय की मैदान में इंटरलॉकिंग ना होने से पूरे मैदान में रेत था और बच्चे जब उसे रेत से होकर कमरों में आते थे तो कमरों में भी रेत हो जाता था पूरा विद्यालय गंदा दिखाई देता था. विद्यालय के पास इतना फंड नहीं था की इंटरलॉकिंग हो पाता.
*समाधान*
हमारे विद्यालय में इसके लिए हमने बच्चों के ग्रीष्मावकाश में समर कैंप का 5 दिन का आयोजन किया और उसके समापन पर जिलाधिकारी महोदय को आमंत्रित किया। और उनसे इंटरलॉकिंग करवाने का अनुरोध किया। उनके निर्देशित करने पर अगले ही दिन से प्रधान द्वारा इंटरलॉकिंग का काम शुरू हो गया। और हमारे विद्यालय को धूल से मुक्ति मिल गई।
*समस्या 5* *विद्यालय में बिजली चले जाने पर पंखा ना चलने पर गर्मी की समस्या।*
*समाधान*
इसके लिए हमने जिले के समाजसेवियों को विद्यालय के कार्यक्रमों में आमंत्रित किया। एवं उनको विद्यालय की प्रगति के साथ-साथ विद्यालय में क्या आवश्यकता है इससे भी अवगत कराया। विद्यालय के बच्चों की उपलब्धि देखकर उन्होंने चार बैटरी और दो इनवर्टर विद्यालय को भेंट किये। अब हमारे विद्यालय में बिजली कभी नहीं जाती।
*समस्या 6* *बच्चों का विद्यालय कम आना अथवा ना आना*
*समाधान*
विद्यालय में जो बच्चे नहीं आते हैं उनको पहले तो फोन करते हैं। और यदि वह फिर भी नहीं आते तो उनके घर पर जाकर संपर्क करते हैं। लेकिन एक बच्चा फिर भी नहीं आ रहा था। तो मैं और मेरे विद्यालय की एक शिक्षिका उस बच्चे के घर सात दिन लगातार गए और रोज उसे बच्चे के घर जाकर उसको तैयार करवा कर विद्यालय लाते थे । वह बहुत बहाने बनाते उसकी मम्मी भी कहती है यार नहीं जाएगा। लेकिन हम उसके घर बैठे ही रहते हम कहते जब तक यह नहीं जाएगा तो हम भी नहीं जाएंगे हम यही आज बैठे रहेंगे । 7 दिन ऐसा करते-करते ,आठवें दिन से वह बच्चा लगातार स्कूल आना शुरू कर दिया और कक्षा 7 से कक्षा 8 तक उसने एक भी दिन की छुट्टी नहीं की। और उसे सर्वाधिक उपस्थिति हेतु पुरस्कृत किया।
*समस्या 7* शैतान बच्चों की समस्या
*समाधान*
बच्चों पर विश्वास करके, बहुत सारा प्यार करके, सबके सामने उसकी तारीफ करना और बताना कि वह था शैतान लेकिन अब वह बन गया है आज से बहुत अच्छा बच्चा। पूरे कक्षा के सामने उसे कमिटमेंट करवाना की आगे से वह किसी बच्चे को नहीं मरेगा। इसका जादुई असर हुआ। ऐसा प्रयोग पांच- छह बच्चों पर किया और यह 100% हमेशा सही साबित हुआ।
★स्वयं के जीवन के संघर्ष एवं सफलताएँ।
मैं जब स्नातक बीएससी किया उसके पश्चात ही मेरा विवाह हो गया फिर मैं B.Ed का एंट्रेंस फॉर्म भरा कई लोगों ने कहा शादी के बाद तुम्हारा सलेक्शन नहीं होगा तुम नहीं पढ़ पाओगी। मैंने इसको एक चैलेंज के रूप में लिया और मेरा सिलेक्शन पहली बार में ही हो गया। उसके बाद एमएड में प्रवेश ले लिया ।इसी बीच एक बेटी का जन्म हुआ ।तब लगा एमएड की परीक्षा में शायद में फेल हो जाऊंगी। मैं बहुत सिलेक्टेड ही पढ़ पाई थी। परंतु मैं प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण हुई। इसके पश्चात मैंने 4 वर्ष एक प्राइवेट विद्यालय में शिक्षण कार्य किया। फिर मेरा बेसिक में सिलेक्शन हो गया और मेरे बेटे का जन्म हुआ। जब मैं ट्रेनिंग करने जाती थी ऑपरेशन से मेरा बेटा हुआ था तो वह सिर्फ एक महीने का था। बहुत ही कठिन परिस्थितियों में मैंने बेसिक की ट्रेनिंग पूर्ण की एक दिन की भी छुट्टी नहीं की।
★कार्यक्षेत्र की उपलब्धियाँ
मैं विद्यालय के बच्चों विशेष कर बालिकाओं को जिला विज्ञान क्लब, बिपनेट क्लब, राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस, इंस्पायर अवार्ड एवं विद्यालय की विज्ञान संबंधी सभी प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग करवाती थी।
*मेरे विद्यालय की राष्ट्रीय आय एवं योग्यता आधारित छात्रवृत्ति परीक्षा में अब तक 88 छात्र-छात्राएं ,श्रेष्ठ परीक्षा में 7 छात्र -छात्राएं,अटल आवासीय परीक्षा में चार छात्र/ छात्राएं , इंस्पायर अवार्ड में तीन बच्चे चयनित हुए हैं। राष्ट्रीय आविष्कार अभियान में मॉडल में विद्यालय की बच्ची ने जिले में प्रथम स्थान प्राप्त किया। तथा दूसरी बच्ची ने क्विज में प्रथम स्थान प्राप्त किया।*
*जिला विज्ञान क्लब के प्रशस्ति पत्र
*समाधान एवं विकास समिति के प्रशस्ति पत्र
*राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस के प्रशस्ति पत्र
*खंड शिक्षा अधिकारी, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी , जिला अधिकारी , डीएफओ, डायट बीसलपुर, पुलिस अधीक्षक, स्काउट गाइड आदि के प्रशस्ति पत्र
★स्वयं की उपलब्धि
*राष्ट्रपति पुरस्कार
*विज्ञान की शिक्षक प्रतियोगिता में राज्य स्तर तक प्रतिभा एवं प्रशस्ति पत्र
*अखबारों में एवं पत्रिकाओं में लेख, कहानी छपना
*जिला स्तर पर सांस्कृतिक कार्यक्रम में प्रतिभाग करने का प्रशस्ति पत्र
*दैनिक जागरण समाचार पत्र द्वारा सम्मान पत्र
*जिला स्तरीय टीएलएम प्रतियोगिता में प्रशस्ति पत्र
*डाइट बीसलपुर में सांस्कृतिक प्रतियोगिता में गायन एवं मैजिक शो में प्रशस्ति पत्र
*मिशन शक्ति कार्यक्रम के अंतर्गत जिलाधिकारी महोदय से प्रशस्ति पत्र
*जिले में सर्वाधिक नामांकन के लिए बेसिक शिक्षा मंत्री श्री संदीप सिंह जी से प्रशस्ति पत्र एवं सम्मान
*भदोही के जिलाधिकारी द्वारा पर्यावरण मित्र सम्मान
*वृंदावन में परिंदा सम्मान
★मिशन शिक्षण संवाद के लिये संदेश:-
मिशन शिक्षण संवाद वास्तव में एक बहुत अच्छा नवाचार है। जिसके माध्यम से बच्चे प्रतियोगिताओं की तैयारी करते हैं। मैं रोज प्रार्थना सभा में इसमें आए हुए सुविचार , आज का शब्द और रोचक तथ्य इत्यादि करवाती हूँ और बच्चों का वास्तव में बहुत ज्ञानवर्धन इससे होता है। मैं चाहती हूं सभी शिक्षक इसका लाभ उठाएं। किसी भी सफलता के पीछे उसकी निरंतरता होती है। मैं इसमें देखती हूं जिसको यह ड्यूटी दी जाती है बहुत ही कर्मठता से उसको निभाते हैं ।यही इसकी सफलता का कारण है।
_✏संकलन_
ज्योति कुमारी(शक्ति संवाद)
*📝टीम मिशन शिक्षण संवाद।*
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