116/2025, बाल कहानी- 31 जुलाई
बाल कहानी- अनमोल उपहार
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आज बड़ी खुशी का दिन था क्योंकि सिमरन का जन्म-दिन जो था। "अपना जन्म-दिन मनाऊँगी आज" सोचती हुई सिमरन विद्यालय आयी और सभी बच्चों ने उसे जन्म-दिन की बधाई दी और शुभकामनाएँ दीं। सिमरन बहुत खुश थी उसने सभी बच्चों को टॉफियाँ भी वितरित कीं।सिमरन ने कई दिन पहले से स्कूल में अपने साथ के बच्चों से कह रखा था कि मैं अपना जन्म-दिन अपने विद्यालय में ही मनाऊँगी। जैसा कि हम सभी जानते हैं कि जन्म-दिन होता है तो तोहफा देने का विचार अचानक ही मन में आ जाता है। हालाँकि सिमरन ने किसी से नहीं कहा था कि कोई उसके लिए उपहार लाये लेकिन फिर भी हमारे छोटे-छोटे प्यारे बच्चे हैं। उनके मन में यह भावना थी कि सिमरन जब जन्म-दिन मनायेगी तो हम उसके लिए कुछ उपहार लायेंगे तो बस! बात फिर क्या बात थी? जैसे ही सिमरन विद्यालय आयी, उसने सभी बच्चियों को टॉफियाँ बाँटनी शुरू दीं। वहाँ पर उपस्थित सभी जितनी भी शिक्षिकाएँ थीं, उन्होंने भी उसको बहुत आशीर्वाद दिया। तभी विद्यालय के सभी बच्चे बोले कि, "हम सिमरन को कुछ उपहार देना चाहते हैं।" तो शिक्षिका महोदय ने कहा कि, "बेटे! तुम अभी बहुत छोटे हो और तुम सब का प्यार ही उपहार है।" शिक्षिका ने बहुत मना किया लेकिन फिर भी बच्चे नहीं माने और अपनी सामर्थ्य अनुसार कोई उसके लिए टॉफी, चॉकलेट ,पेंसिल, रबर और इसी तरीके की छोटी-छोटी चीज लेकर आया और सिमरन को देने लगे। सिमरन खुश हो रही थी, तभी अनुष्का वहाँ आयी क्योंकि अनुष्का को पता नहीं था कि उसे कोई उपहार लेकर आना है तो वह थोड़ी सी उदास हुई और उसने कहा कि, "मैं सिमरन के लिए कोई भी उपहार नहीं ला पायी हूँ लेकिन मेरे मन में एक उपहार की बात आयी है। अगर आपकी अनुमति हो तो मैं सिमरन को एक उपहार दे दूँ?" शिक्षिका ने कहा, 'बेटा! उपहार लाना कोई जरूरी नहीं है। तुम सब प्यार से रहो! परस्पर मेल-जोल से रहो! सब एक-दूसरे के साथ खुशियाँ बाँटो और आपस में मेहनत करो! ईमानदारी, लगन, निष्ठा के साथ पढ़ो-लिखो और बहुत ऊँचे और महान बनो।" लेकिन फिर भी अनुष्का भी छोटी-सी बालिका थी। उसके मन में था कि मैं उसे कुछ दूँ। तभी उसने हमारे विद्यालय में लगे कुछ पौधों में से एक नन्हा-सा पौधा छुआ, जो उसने हमारे इको-क्लब कार्यक्रम में रोपित किया था क्योंकि विद्यालय में बहुत सारे पौधे बड़े हो गए थे, तो अनुष्का ने कहा कि, "अगर आप कहें तो मैं एक नन्हा सा पौधा सिमरन को उपहार में दे दूँ?" इससे इसके घर पर भी हरियाली होगी और हम सबको भी अपनी पर्यावरण और पौधों के महत्व के बारे में पता चलेगा।" तो बस फिर क्या था? वहाँ उपस्थित सभी शिक्षिकाएँ भी भाव-विभोर हो गयीं। उन्होंने अनुष्का को इस कार्य के लिए अनुमति दे दी। तभी उसने छोटा-सा, नन्हा-सा पौधा अपने हाथों से समस्त बच्चों के सामने सिमरन के हाथ में थमा दिया। यह देखकर वहाँ उपस्थित सभी शिक्षिकाओं ने अनुष्का के लिए जोरदार तालियाँ बजायीं और उसकी इस सुन्दर पहल के लिए उसकी सराहना की और इसे खूब सारा आशीर्वाद दिया तथा आगे बढ़ने के लिए भी प्रेरित किया। हमारे जीवन में जो पर्यावरण है उसके महत्व को बताते हुए भी बच्चों को और भी रोचक जानकारी प्रदान की। अब इस तरह से सिमरन का जन्म-दिन बहुत खुशहाल बन चुका था। विद्यालय के सभी बच्चे और वहाँ पर उपस्थित शिक्षिकाएँ भी बहुत खुश थीं। सभी ने जोरदार तालियों के साथ सिमरन को जन्म-दिन की बधाइयाँ दीं और वहाँ पर उपस्थित प्रिंसिपल मैम थी, ने भी सिमरन को उपहार में अपनी ओर से एक छोटा-सा तोहफा दिया। इस तरीके से सिमरन का जन्म-दिन बहुत ही सुन्दर तरीके से मनाया गया और आगे के लिए बच्चों को भी कुछ सीखने को मिला।
#संस्कार_सन्देश -
हमारे पास पैसे हों या न हो, संसाधन हों या न हों, हम चाहे गरीब हों या अमीर हों, हमें सभी को बराबर समझना चाहिए।
*कहानीकार-*
#गरिमा_वार्ष्णेय (इं०प्र०अ०)
प्राथमिक विद्यालय कलवारी
नगर क्षेत्र हाथरस (हाथरस)
✏️संकलन
📝टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद
#दैनिक_नैतिक_प्रभात
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