97/2025, बाल कहानी- 09 जुलाई
बाल कहानी - माता पिता का सहयोग
दीपक कक्षा चार में पढ़ता है। वह हमेशा शान्त और चुपचाप सा रहने वाला बच्चा था। वह कक्षा में बिल्कुल भी शैतानी नहीं करता था। एक दिन उसकी दादी विद्यालय आयी। उन्होंने बताया कि, "उसकी माँ उसके छोटे भाई के होने के बाद से बहुत उदास सी रहती है। उनका मानसिक सन्तुलन बिगड़ गया है, जिसकी उन्हें दवाई खानी पड़ रही थी। पिता सुबह काम पर चले जाते है। दीपक स्वयं सुबह पराठा/रोटी बनाकर या रात की रोटी के साथ चाय बनाकर खुद भी और भाई को चाय के साथ खिलाता है। उसकी एक छोटी बहन भी है, जिसकी देखभाल भी वही करता है। आजकल छुट्टियों में वह अपने पिताजी के साथ उनके टाइल के काम में सहयोग करने जाता है। भाई बहन को गृहकार्य भी करवाता है।
एक दिन उसकी अध्यापिका कुछ काम से टाइल की दुकान पर गई। वहाँ उन्होंने उसे दुकान में देखा। उसने उन्हें देखते ही कहा, "मैम! मैंने छुट्टियों का काम भी पूरा कर दिया है।" मैंम को तो पहले से ही उसकी सही आदतों का पता था। उन्होंने उसकी भूरी-भूरी प्रशंसा की। अब मैंम ने ग्रुप में भी लिखा कि, "हमें अपने स्तर के अनुसार अपने माता-पिता का सहयोग जरूर करना चाहिए।
#संस्कार_सन्देश -
माता-पिता ईश्वर रुप होते हैं। हमें इनका मान-सम्मान, आज्ञा-पालन, सेवा और सहयोग करना चाहिए।
कहानीकार-
भावना पाण्डे (स०अ०)
रा० प्रा० वि० कठघरिया,
हल्द्वानी, नैनीताल (उत्तराखण्ड)
✏️संकलन
📝टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद
#दैनिक_नैतिक_प्रभात
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