113/2025, बाल कहानी- 28 जुलाई
बाल कहानी- आनन्द और प्रसन्नता
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आज सावन माह का पहला दिन है। दादी ने पूजा के बर्तन साफ किये। एक फोटो को साफ करके सुधा के पास दिया और कहा कि, "इसे पूजा की थाली में अच्छे से खड़ा करके रख दे।"
सुधा ने फोटो को पढ़ा। भगवान शिव शंकर के परिवार के साथ जानवर भी दिखाई दे रहे हैं। वह ध्यान से उस फोटो को देखने लगी। उसमें शेर, बैल, मयूर और चूहा भी हैं। उसने फोटो को यथा-स्थान रखा और दादी से बोली, "दादी! इसमें तो इन्होंने सारे जानवरों को पाल रखा है। इन्हें भी जानवर पालने का शौक रहा होगा ना।"
दादी ने कहा, "शिवजी का यह परिवार हमें आपस में मेल-जोल से रहना सिखाता है। यह हमें विषमता में जीवन जीना सिखाते हैं। शिव जी के गले में जो माला देखी तुमने, वह विश्व-धर्म सर्प हैं। यह सर्प जहरीले होते हैं। जिनसे डर लगता है। हम या तो उनसे दूर रहते हैं अथवा उनकी पूजा करते हैं, अर्थात अपना बचाव करते हैं। भगवान शिव के गले में नाग विचरण करते हैं। हम ऊपर से जल चढ़ाकर उन्हें जाने-अनजाने छेड़ते-चिढ़ाते भी हैं। पूजते भी हैं, लेकिन इससे शिव की शान्ति भंग नहीं होती। वह अपने कल्याणकारी भाव का त्याग नहीं करते। विषधर सर्प धारण करने का मतलब है- अनेक कठिनाइयों को, अनेक जिम्मेदारियाँ को अपने ऊपर ले लेना। जीवन है तो मुश्किलें तो आयेंगी ही। बस! जो उन्हें हॅंसकर सह लेता है, वह शिव स्वरूप बन जाता है और जो उन्हें नहीं सह पाता, वह अकेला रह जाता है। मृतक समान (शव) बन जाता है। मुश्किलों का समाधान उनसे मुकर जाना नहीं है, मुश्किलों को मुस्कुराकर सामना करने से ही हमें सफलता मिलती है और आनन्द प्राप्त होता है। मुश्किल भरी विषम घड़ी में यदि आप चेहरे पर मुस्कान लाने की हिम्मत जुटा पाते हैं तो फिर आपकी आन्तरिक शान्ति भंग करने की सामर्थ्य किसी में है ही नहीं।" सुधा बहुत प्रसन्न हुई। उसने दादी का बहुत-बहुत धन्यवाद और आभार प्रकट किया।
#संस्कार_सन्देश -
भगवान शिव के गले में सपों की माला, विश्व-धर्म, विषमता में आनन्द और प्रसन्नता से जीवन जीना सिखाती है।
कहानीकार-
#सरोज_डिमरी (स०अ०)
राजकीय उच्च प्रा० वि० घतोड़ा,
कर्णप्रयाग, चमोली (उत्तराखण्ड)
✏️संकलन
📝टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद
#दैनिक_नैतिक_प्रभात
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