गुरु पूर्णिमा
धन्य हमारी धरा जहां पर
गुरुओं का है वास।
जिनके चरणों में मिट जाता
सारा शोक विलास।
मन से आशीषों की वर्षा
वाणी में माँ शारदा का वास।
अंधकार में भी दिख जाता
ज्ञान का अपार प्रकाश।
गुरु बिन लगे अधूरा जीवन
कृपा से बुझती प्यास।
शब्द- शब्द मंत्र बन जाता
रख अटूट विश्वास।
नमन हृदय से उन गुरुओं को
जिनकी निष्ठा जात।
गुरु पूर्णिमा के अवसर पर
उनको जोड़ें हाथ।
कभी न भूलें ऋण
हम उनका।
जिन्होंने सँभाली
जीवन पात।
रचयिता
डॉ0 निशा मौर्या,
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय मीरजहांपुर,
विकास खण्ड-कौड़िहार-1,
जनपद-प्रयागराज।

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