109/2025, बाल कहानी- 23 जुलाई
बाल कहानी - सीख
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आज चारु की माताजी बड़ी परेशान थी, क्योंकि उनके तीनों बच्चे, चारु, मनोज और किशन घर नहीं पहुँचे थे। उसकी माताजी ने विद्यालय में फोन किया तो पता चला कि मैंम लोगों ने उन्हें ऑटो में बैठते तो देख ही लिया था। आखिर फिर वे कहाँ चले गए?
अनेकों जगहों पर फोन किया, कहीं बच्चों का पता नहीं चला। अब ढूँढें तो ढूँढें कहाँ उन्हें? कक्षा के सभी बच्चों को फोन किया, पर कोई पता नहीं चला।
एक लड़की दिशा, जो चारु की कक्षा में पढ़ती थी, उसके पिताजी ने कहा कि, "अरे! मैं तो अभी उनको घर जाने के लिए ऑटो में बैठा के आया हूँ। वे तो हमारे यहाँ आये थे।" तब जाके सबकी जान में जान आई। मैंम और घर पर उनकी माँ पिताजी को कुछ सान्त्वना मिली। बच्चों के घर पर आने पर माँ पिताजी ने उन्हें बहुत डाँटा और समझाया कि, "कभी भी विद्यालय से कहीं न जायें, सीधे घर पर ही आयें।" बच्चो ने भी वादा किया कि आगे से वे कभी भी ऐसा नहीं करेंगे, उनको सीख जो मिल गई थी।
#संस्कार_सन्देश-
हमें अपने घर-वालों या अध्यापक/अध्यापिका को बताये बिना कहीं नहीं जाना चाहिए।
कहानीकार-
#भावना_पाण्डे (स०अ०)
रा० प्रा० वि० कठघरिया
हल्द्वानी, नैनीताल (उत्तराखण्ड)
✏️संकलन
📝टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद
#दैनिक_नैतिक_प्रभात
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