110/2025, बाल कहानी - 24 जुलाई
बाल कहानी - राधा की होशियारी
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राधा प्राथमिक विद्यालय बेंदा (डांडा) में कक्षा दो की छात्रा थी। वह स्कूल जाने वाली नियमित छात्राओं में से थी। वह अपने गुरूजनों का सदैव सम्मान व उनकी आज्ञा का पालन करती थी।
बेंदा गाँव अति पिछड़ा गाँव है। यह गाँव आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित था। बैंदा गाँव से आगे की सड़क इछौरा ग्राम पंचायत को जाती है, जहाँ पर बालू का असीमित भण्डार है। बाहरी ठेकेदार बालू का पट्टा कराकर ट्रक चलवा रहे थे। सभी ट्रक प्राथमिक विद्यालय बेंदा से होकर गुजरते थे। स्कूल में बच्चों का भोजनावकाश चल रहा था। राधा दरवाजे के पास खड़ी थी। उसने देखा कि आगे वाले ट्रक की रफ्तार तेज होने के कारण ट्रक के पीछे का कुछ हिस्सा बिजली के खम्भे से जा टकराया। स्कूल के पास ही लगे खम्भे से ग्यारह हजार वोल्टेज की लाइन का बिजली का तार टूटकर नीचे गिर गया। सामने से दूसरे ट्रक के आने की आवाज दस्तक दे रही थी। राधा तुरन्त भागकर स्कूल के भोजन वाले कमरे में गयी। जहाँ लाल रंग के रखे कपड़े को उठाकर बीच रास्ते में और बच्चों के साथ खड़ी हो गयी। वो जानती थी कि लाल रंग खतरे का निशान होता है, जिसका अर्थ है- 'रूको'।
सामने से ट्रक वाले अंकल ने देखकर ट्रक को रोक दिया। जब वे स्कूल के पास आये तो सारा मामला समझ गये। उन्हें लगा कि इस बच्ची ने आज उनकी जान बचा ली। अंकल ने बच्ची को गोद में उठाकर उसकी प्रशंसा उपहार स्वरूप सौ रूपये देने चाहे, लेकिन राधा ने रुपये लेने से मना कर दिया। उसके संस्कार ने सबको अचम्भित कर दिया। राधा ने कहा, "हमारे गुरू जी ने सिखाया कि सदैव परहित में किया गया कार्य हमारा दायित्व एवं कर्तव्य है। सर्वप्रथम राष्ट्रहित है, उसके बाद और कुछ।" यह सुनकर ट्रक वाला अंकल बहुत प्रसन्न हुआ। तभी वहाँ गाँव वाले आ गये और ग्राम प्रधान ने लाइनमैंन को सूचना दी। सूचना पाकर लाइनमैंन ने तुरन्त सिटडाउन लेकर उस तार को ग्रामीणों की मदद से एक तरफ किया और तार को जोड़कर लाइन चालू करवायी।
#संस्कार_सन्देश -
मनुष्य जीवन परोपकार के लिए है। सदैव राष्ट्रहित व परहित के लिए कार्य करना चाहिए, यही हमारा दायित्व व कर्तव्य है।
कहानीकार-
#मिथुन_भारती (स०अ०)
प्राथमिक विद्यालय बेंदा डांडा
वि० क्षे० सरीला, जनपद- हमीरपुर
✏️संकलन
📝टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद
#दैनिक_नैतिक_प्रभात
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