100/2025, बाल कहानी- 12 जुलाई


बाल कहानी - सफलता
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चाँदपुर गाँव में एक किसान अपने परिवार के साथ खुशहाली जीवन जी रहा था। परिवार छोटा था। उसके दो बेटे सोहन और मोहन बड़े होशियार थे। पढ़ाई करने के बाद काम में पिता का हाथ बताते थे। खेत पर जाकर दोनों भाई एक ही कक्षा पाँच के छात्र थे। एक वर्ष गाँव में बरसात नहीं हुई और पानी की परेशानी बढ़ती गई, जिससे सभी किसानों की फसल बेकार होने लगी। सभी गाँव वाले प्रधान जी के पास गये और एक तालाब खोदने के लिए कहा। प्रधान राजी हो गए। सभी ने मिलकर तालाब खोद लिया और अपनी फसल के लिए पानी लेने लगे। 
एक दिन सोहन और मोहन तालाब के किनारे बैठे हुए थे। उसमें कुछ मछलियाँ तैर रही थी। वह दोनों बहुत खुश हुए और घर आकर अपने पिताजी से कहा, "पिताजी! हमने तालाब में मछलियाँ देखी थीं। क्यों न हम अपने खेत में थोड़ा-सा भाग लेकर गड्ढा कर दिया जाए और मछलियाँ उसमें डाल दी जाएँ तो हमको बहुत मुनाफा होगा। मछलियों को बेचकर हम काफी रुपए कमा सकते हैं।" पिताजी को उनका सुझाव बहुत अच्छा लगा। वह बहुत प्रसन्न हुए कि इन बच्चों के दिमाग में अपने जीवन यापन की बात तो आयी। उन्होंने दूसरे दिन खेत में खुदाई चालू कर दी और एक छोटा-सा तालाब बनाकर मछलियाँ पालने लगे। अब मछली बड़ी हो गईं। उनको बाजार में ले जाकर बेच देते थे। उनकी आर्थिक स्थिति आमदनी के अनुसार बढ़ती गई। पड़ोस में ही रामलाल भी रहता था जब उन्होंने यह सब देखा तो प्रधान जी से जाकर शिकायत कर दी कि, "इन्होंने हमारे द्वारा तालाब से मछली चुराई हैं और सारा पैसा बेचकर धनवान होते जा रहे हैं।" यह बात सभी गाँव वालों को मालूम पड़ गई। प्रधान जी जब उनके यहाँ पर गये और कहा कि, "आपने तालाब से मछली चुराकर अपना व्यापार शुरू किया है। यह गलत है आपको सजा मिलेगी।" 
सोहन और मोहन बड़े निराश हुए कि यह तो हमारी मेहनत से व्यापार हुआ है। उन्होंने कहा, "प्रधान जी! हमने आपके तालाब से मछली नहीं लीँ। हमने बाजार से खरीदकर अपने खेत में तालाब बनाकर यह सब किया है। यदि आपको विश्वास नहीं होता तो जिससे मछली खरीद कर लाये हैं, आप उससे पूछ लीजिए।" प्रधान जी ने पता लगाया तो बात बिल्कुल सही निकली। उन्होंने पंचायत बुलाकर बताया कि, "यह सब सोहन और मोहन की सूझ-बूझ के कारण सफलता मिली है। यदि आप सभी को मेहनत करके धन कमाने की इच्छा होती, तो आप चुगली नहीं करते। आप भी तालाब खोदकर अपने व्यापार को बढ़ा सकते थे।" सभी ने सोहन और मोहन को शाबाशी दी। जब सभी ने तालियाँ बजायीं तो सोहन और मोहन के पिता का सिर गर्व से और ऊँचा हो गया। 
दूसरे दिन विद्यालय में मास्टर जी ने प्रार्थना सभा के बाद सोहन और मोहन को शाबाशी दी और सभी बच्चों से कहा कि, "आप भी इन दोनों की तरह ही मेहनत करोगे जिस क्षेत्र में, तो सफलता आपको हमेशा मिलेगी।" सभी ने ताली बजाई और एक शपथ ली कि, "हम बचपन से ही लगन और मेहनत करके अपने पिताजी का सहयोग करेंगे ताकि बचपन से ही आगे बढ़ाने की शिक्षा मिले मास्टर जी ने सभी को गले लगा लिया। 

#संस्कार_सन्देश -
हमें हर क्षेत्र में सफलता चाहिए तो बचपन से ही अच्छे कार्य को करने के लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए। बस! मन में हमेशा सफलता पाने की इच्छा रखनी चाहिए तो सफलता हमेशा मिलती है।

कहानीकार-
#पुष्पा_शर्मा (शि०मि०)
पी० एस० राजीपुर
अकराबाद, अलीगढ़ (उ०प्र०)

✏️संकलन
📝टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद
#दैनिक_नैतिक_प्रभात

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