96/2025, बाल कहानी- 08 जुलाई
बाल कहानी - जागरूकता
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रामू एक किसान था। वह खेती-बाड़ी करके अपने परिवार का भरण-पोषण करता था। उसके परिवार में माता-पिता, पत्नी और एक बेटी थी मीना।
मीना कक्षा पाँच की छात्रा थी। वह प्रतिदिन विद्यालय जाती थी और अध्यापकों द्वारा बताए गए पाठ को ध्यान से सुनती थी। वह प्रतिदिन अपनी माँ और दादी को सारी बातें बताया करती थी।
बरसात का मौसम था। मीना स्कूल से वापस घर जा रही थी। मीना देखती है कि उसकी कुछ सहेलियाँ गाँव की सूखी नदी के बीच नहा रही थीं। यह देखकर मीना को अपने अध्यापक द्वारा बताई गई बात याद आती है कि हमें कभी नदी के बीच में जाकर नहीं नहाना चाहिए। बरसात के मौसम में पानी का कोई भरोसा नहीं होता, नदी का जलस्तर किसी भी वक्त बढ़ सकता है। मीना बिना देर किए तुरन्त अपनी सहेलियों को आवाज लगाती है। उसकी सहेलियाँ कुछ दूरी पर थी इसलिए वह उसकी बात ठीक से नहीं समझ पातीं। वे सब मीना की बात सुनने के लिए बाहर आती हैं। वे अभी ठीक से किनारे तक नहीं पहुँच पायी थीं कि अचानक से नदी का जलस्तर बढ़ने लगता है। वे सब भाग कर अपनी जान बचातीं हैं। वे सब आकर के मीना को 'धन्यवाद' देती है कि आज मीना की वजह से उन सबकी जान बच गई।
अब तो मीना की प्रशंसा गाँव में चारों ओर हो रही थी, क्योंकि मीना ने अपनी चार सहेलियों का जीवन बचाया था। सभी गाँव वाले मीना की जागरूकता के लिए उसकी प्रशंसा .करते हैं और वे बरसात के मौसम में नदी की बीच धारा में न जाने का निश्चय करते हैं।
जब मीरा विद्यालय पहुँचती है, तो उसके अध्यापक उसका स्वागत करते हैं। सभी बच्चे स्वागत में तालियाँ बजाते हैं। अध्यापक बच्चों को मीना जैसा जागरूक बनने के लिए कहते हैं। जागरूक बनकर हम अपना और दूसरों का जीवन बचा सकते हैं।
#संस्कार_सन्देश -
हमें जागरुक बनना चाहिए। जागरूक बनकर ही हम अपना और दूसरों का जीवन बचा सकते हैं।
कहानीकार-
#मृदुला_वर्मा (स०अ०)
प्रा० वि० अमरौधा प्रथम
अमरौधा (कानपुर देहात)
✏️संकलन
📝टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद
#दैनिक_नैतिक_प्रभात
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