114/2025, बाल कहानी- 29 जुलाई
बाल कहानी- लगन और प्रदर्शन
--------------------------
एक विद्यालय में एक शिवम नाम का बच्चा पढ़ने जाता था, लेकिन वह खेलने-कूदने में ही अपना समय नष्ट कर देता था। वहाँ के गुरूजी उसे बहुत समझाते थे, पर शिवम नहीं मानता था। गुरूजी कहते कि, "पढ़ाई में मन लगाओ!" उस समय शिवम 'हाँ' बोलता और बाद में फिर खेलने-कूदने में ही अपना समय नष्ट कर देता था। इस तरह वह पहली कक्षा से कक्षोन्नत होकर कक्षा तीसरी में चला गया था और उसे वर्णमाला तक का ज्ञान नहीं था। अब गुरूजी ने भी उस पर ध्यान देना छोड़ दिया था। वह बच्चा कुछ भी नहीं जानता था।
एक दिन उसके विद्यालय में एक नये शिक्षक स्थानान्तरित होकर आये। उस शिक्षक ने पहले ही दिन सभी कक्षाओं के बच्चों की टेस्ट परीक्षा ली। उससे उनको सभी बच्चों के बुध्दि-लब्धि का पता चल गया। पाँच बच्चों को वर्णमाला का ज्ञान नहीं था। शिक्षक ने पता लगाया तो पता चला कि वे बच्चे पढ़ाई-लिखाई में बिल्कुल भी ध्यान नहीं देते थे। वे बच्चे हमेशा खेलते रहते थे। शिक्षक ने उनके दिमाग को कुछ दिन पढ़ा, फिर उसने एक खेल पर अधारित शिक्षा का नवाचार किया और खेल-खेल में पढ़ाना शुरू किया। नये शिक्षक ने कहा, "उस खेल में वही लोग भाग ले सकते हैं, जिनको हिन्दी वर्णमाला का ज्ञान हो और जिसे पढ़ना-लिखना आता हो।"
वे बच्चे खेल में भाग नहीं ले पा रहे थे, जिनको वर्णमाला का ज्ञान नहीं था। फिर वे बच्चे हिन्दी वर्णमाला पढ़ने-लिखने में रूचि लेने लगे और रोज केवल पढ़ाई-लिखाई में ध्यान देने लगे।
मात्र एक सप्ताह में वे बच्चे हिन्दी वर्णमाला को पढ़ना और लिखना सीख गये। फिर अपने गुरूजी से बोले, "हमें भी खेल खेलना है।" अब उन बच्चों की पढ़ाई यहीं से शुरू हो गई। शिक्षक ने उन बच्चों को खेल में शामिल कर लिया और खेल-खेल में ही उन बच्चों को पढ़ाना शुरू किया। फिर उन बच्चों में पढ़ने की रूचि बढ़ने लगी। वे सभी बच्चों के साथ पढ़ने-लिखने में अधिक ध्यान देने लगे। उन बच्चों ने उस खेल के माध्यम से खेल-खेल में शब्द जोड़, अनुच्छेद पढ़ना, कहानी पढ़ना तथा गिनती, पहाड़े, जोड़-घटाव, गुणा-भाग सभी गणितीय संक्रियाएँ सीख लीं और सबसे अधिक होशियार हो गये। शिवम सबसे अधिक होशियार हो गया, जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। चार और बच्चे भी पढ़ाई-लिखाई में आगे हो गये। गुरूजी सभी बच्चों को बराबर शिक्षा देते थे और सभी बच्चों को बोलते थे कि, "अपने गुरूजी से रोज प्रश्न पूछें।" सभी बच्चों ने पढ़ाई-लिखाई में मन लगाया। वे रोज प्रश्न पूछते थे। जिन बच्चों को अपने गुरूजी से प्रश्न करना आ गया, वे बच्चे जल्दी सीखते हैं और उनका पढ़ाई-लिखाई में ध्यान बढ़ता है। स्मरण शक्ति बढ़ती है। सारे बच्चों ने पढ़ाई-लिखाई पर विशेष ध्यान दिया, लेकिन शिवम ने विद्यालय का नाम अधिक रोशन किया। विद्यालय के अन्य सभी शिक्षकों ने अपने नये शिक्षक की बहुत प्रशंसा की और उन पाँच बच्चों की प्रशंसा भी की। आगे चलकर वे बच्चे बड़े-बड़े पोस्ट में अधिकारी हो गये और सुखद जीवन ब्यतीत कर रहे हैं।
#संस्कार_सन्देश -
शिक्षा के प्रति शिक्षक एवं विद्यार्थी दोनों में पूर्ण लगन से ही बच्चों के ज्ञान में वृद्धि होती है।
कहानीकार-
#प्रेमलाल_किशन (शिक्षक)
शासकीय प्राथमिक शाला बुढ़नपुर, संकुल केन्द्र- गहरीनमुड़ा, विकास खंड व जिला- सक्ती (छत्तीसगढ़)
✏️संकलन
टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद
#दैनिक_नैतिक_प्रभात
Comments
Post a Comment