गुरु महिमा
गुरू बिन ज्ञान नहीं है सम्भव
प्यारे इस भव सागर में।
शुद्ध सारगर्भित वाणी से
ज्ञान भरें जो गागर में।।
सकल विश्व और अचराचर में
गुरू महिमा सबसे भारी।
अक्षर-अक्षर जोड़ ज्ञान का
नैया फिर भव से तारी।।
प्रथम गुरु माता है जग में
द्वितीय पिता पर बलिहारी।
नित नूतन नवीन गुण उपजे
वो आदर के अधिकारी।।
ऐसे गुरू के श्री चरणों में
बारम्बार प्रणाम है।
भला बुरा का भेद बताएँ
ऐसे गुरू भगवान हैं।।
रचयिता
रीता गुप्ता,
सहायक अध्यापक,
पूर्व माध्यमिक विद्यालय कलेक्टर पुरवा,
विकास खण्ड-महुआ,
जनपद-बाँदा।

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