99/2025, बाल कहानी- 11 जुलाई


बाल कहानी - गुरु पूर्णिमा 
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छोटा रोहन आज बहुत खुश था। उसकी खास वजह थी। वह आज दादा जी के साथ मेला देखने जा रहा था। छोटे रोहन के दादाजी अध्यापक थे। रोहन ने अपने दादाजी से कहा, "दादा जी! कितनी देर में चलोगे? मेला खत्म हो जाएगा!" रोहन के दादाजी ने कहा, "रुको बेटा! जरा मैं किसी से मिल लूँ!" "कौन है दादाजी! आप किस से मिलना चाहते हो?"
दादाजी ने कहा, "बेटा! आज गुरु पूर्णिमा है। इसको आषाढ़ की पूर्णिमा भी कहते हैं। आज के दिन गुरु के सम्मान का दिन होता है। जो गुरु का सम्मान करता है, उसको यश की प्राप्ति होती है बेटा! आज के दिन मिलकर हमें गुरुजनों की पूजा करनी चाहिए। साथ में स्नान, दान, पुण्य का दिन भी होता है।"
छोटा रोहन कहने लगा, "दादाजी! मैं समझ गया। लगता है आपसे कोई बच्चा, कोई छात्र मिलने आ रहा है।"
दादाजी ने कहा, "सही कह रहे हो बेटा! एक छात्र आ रहा है, वह सिर्फ मेरे चरण छूकर आशीर्वाद लेना चाहता है।" 
"अच्छा दादाजी! चलो... मैं थोड़ा रुक जाता हूँ। मेले में थोड़ी देर में जायेंगे।"
दादाजी ने कहा, "बेटा! आज के दिन स्नान, पूजा-पाठ के साथ आश्रमों में गुरु की श्रद्धा में कार्यक्रम किए जाते हैं।" मेला दिखाने के बाद शाम को मैं तुम्हें आश्रम ले चलूँगा।" 
यह सुनकर खुश होकर रोहन ने कहा, "अच्छा दादाजी!" 
तभी बाहर से आवाज आयी, "गुरु जी!.. गुरुजी!.. कहाँ हैं आप?" दादाजी ने कहा, "लगता है मेरा छात्र आ गया है। तुम कुछ देर बैठो.. मैं अभी आता हूंँ।" ऐसा कहकर दादाजी अपने प्रिय छात्र के पास चले गये।
छोटा रोहन सोचने लगा कि, "बड़ा होकर वह भी अपने गुरु जी के पास गुरु पूर्णिमा के दिन जायेगा उनसे आशीर्वाद लेने के लिए।" तभी दादी की आवाज आयी, "रोहन! इधर आओ बेटा! चलो..मेला जाने की तैयारी कर लो।" सुनते ही रोहन चला गया।

संस्कार सन्देश -
गुरु पूर्णिमा हमारी आस्था का पर्व है, हम सबको मिल-जुलकर मनाना चाहिए।

लेखक-
शालिनी (स०अ०)
प्राथमिक विद्यालय न० कूँड़
विकास क्षेत्र- करहल, मैनपुरी

✏️संकलन
📝टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद
#दैनिक_नैतिक_प्रभात

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