93/2025, बाल कहानी- 04 जुलाई
बाल कहानी- चोरी का अन्त बुरा
सिमर और कनक दो बहनें थी। दोनों बहुत होशियार और नटखट थीं। दोनों कक्षा पाँच की छात्राएँ थीं। वे अपने गुरूओं, माता-पिता का कहना मानती थी और उनकी आज्ञा का पालन करती थीं।
एक दिन उनके मोहल्ले में एक साहूकार के यहाँ रात में चोरी हो गई। साहूकार के यहाँ लगे सी० सी० टी० वी० कैमरों की वजह से चोरों की पहचान हो गई। थाने में साहूकार ने चोरों के खिलाफ रपट लिखवाई।पुलिस चोरों को पकड़ कर मारती हुई थाने ले आयी। पुलिस ने चोरों को बहुत पीटा और जेल में बन्द कर दिया।
डर की वजह से अब मोहल्ले में चोरी होना बन्द हो गई। सिमर और कनक के पूछे जाने पर माँ ने बताया कि, "चोरों का नाम थाने के रजिस्टर में लिख दिया गया होगा।" माँ ने कहा, "चोरी करना पाप है। जो चोरी करता है, पुलिस थाने ले जाकर उसकी बहुत पिटाई करती है और जेल में बन्द कर देती है।" तब बच्चों ने जाना कि चोरी करना पाप है, चोरी का अन्त बुरा होता है।
संस्कार सन्देश-
चोरी चाहे एक रूपये की हो अथवा लाखों रूपये की, चोरी चोरी ही होती है। चोरी करना पाप है और चोरी का अन्त बुरा होता है।
कहानीकार-
मिथुन भारती (स०अ०)
प्रा० वि० खेड़ा-शिलाजीत
वि० क्षे० सरीला, हमीरपुर (उ०प्र०)
✏️संकलन
📝टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद
#दैनिक_नैतिक_प्रभात
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