111/2025, बाल कहानी- 25 जुलाई


बाल कहानी - धारणा
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राधिका कक्षा 8 की छात्रा थी। वह पढ़ने में बहुत होशियार थी लेकिन वह समय से विद्यालय से नहीं पहुँचती थी, जिसके कारण कक्षा अध्यापक उसे समझाया करते कि, "बेटा! समय पर आया करो.. तुम्हारी बहुत ही महत्वपूर्ण पढ़ाई छूट जाती है।" जिस पर राधिका उनसे प्रतिदिन जल्दी आने का वादा करती लेकिन लाख समझाने के बाद भी राधिका का देर से आने का क्रम जारी रहा। लगातार दो सप्ताह देर से पहुँचने पर जब राधिका विद्यालय पहुँची तो उसके अध्यापक ने उसे बहुत डाँट लगायी। राधिका चुपचाप सारी डाँट सुनती रही और फिर उसे खड़े होने की सजा मिली।
अध्यापक ने अपने पढ़ाने का क्रम जारी रखा। उन्होंने ब्लैकबोर्ड पर एक कठिन सवाल दिया और कक्षा के छात्रों को हल करने के लिए कहा। बारी-बारी से सभी छात्रों ने प्रयास किया, पर उस सवाल को कोई न कर सका। जब राधिका की बारी आयी तो थोड़ी ही देर मे राधिका ने उस सवाल को हल दिया। अध्यापक यह देखकर चौंक गए, पर उन्होंने बिना कुछ कहे उसे बैठने के लिए कहा। उनके मन में एक सवाल लगातार उठ रहा था कि राधिका लगातार एक माह से इस विषय को नहीं पड़ रही है, पर उसने इतनी जल्दी से सवाल कैसे हल कर दिया? जरूर उसके साथ कोई समस्या है। मुझे उसका पता लगाना चाहिए। यह जानने के लिए अगले दिन सुबह जल्दी वे राधिका के घर गये।
घर पहुँचकर उन्होंने देखा कि राधिका की माँ बीमार है और वह अपने छोटे भाई-बहनों के लिए खाना बना रही थी। यह देखकर उनके सामने स्थिति स्पष्ट हो गई। वे बिना कुछ कहे विद्यालय वापस आ गये। जब राधिका विद्यालय देर से पहुँची तो अध्यापक ने उसे शाबाशी दी और कहा, "बेटा! तुमने अपने घर और बाहर दोनों जिम्मेदारियों को निभाया है। मुझे बिना सोचे-समझे तुम्हें नहीं डाँटना चाहिए था।" राधिका उन्हें बताती है कि, "विद्यालय से लौटने के बाद समय मिलने पर वह अपना सारा छूटा हुआ कार्य पूरा करती है। मेहनत और लगन से पढ़ाई करती है।" यह सुनकर अध्यापक बहुत प्रसन्न हुए। पूरी कक्षा ने तालियाँ बजाकर उसका स्वागत किया। राधिका बहुत प्रसन्न हुई।

#संस्कार_सन्देश -
हमें बिना सोचे समझे किसी के प्रति गलत धारणा नहीं बननी चाहिए।

कहानीकार-
#मृदुला_वर्मा (स०अ०)
प्रा० वि० अमरौधा प्रथम
अमरौधा (कानपुर देहात)

✏️संकलन
📝टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद 
#दैनिक_नैतिक_प्रभात

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