104/2025, बाल कहानी-17 जुलाई
बाल कहानी - सच्चाई का ईनाम
------------------------
किसी गाँव में राधा नाम की एक लड़की रहती थी। वह पढ़ाई में बहुत ही होशियार थी। वह प्रत्येक कार्य बड़ी ईमानदारी से किया करती थी। उसके पिता सामान्य कृषक थे। वह बड़ी मुश्किल से घर का खर्चा चलाते थे। पढ़ाई के बाद राधा किसी के घर पर छोटा-मोटा काम करती ताकि घर में कुछ मदद हो सके।
एक दिन घर पर सफाई का काम करते समय उसे एक थैला मिला, जिसमें बहुत कीमती सामान था। राधा ने घर का सम्पूर्ण कार्य समाप्त कर मालिक के पास जाकर कहा कि, "मुझे सफाई करते हुए यह बैग मिला, मैंने सोचा, इसमें क्या पता आपका बहुत जरूरी सामान होगा, तो मैंने ये बैग रख दिया था। आप खोलकर देख लीजिए। मैंने सिर्फ बैग उठाया और अलग रख दिया था कि मालिक अपने बैग का निरीक्षण स्वयं कर लेंगे।"
मालिक राधा की बातों से बहुत प्रभावित हुए। उन्होंने राधा से कहा कि, "तुम चाहती तो इस बैग का सामान रख भी सकती थी, लेकिन तुमने ईमानदारी दिखायी। आज से मैं तुम्हारी पढ़ाई का सम्पूर्ण खर्च उठाऊँगा।"
उस दिन से राधा की जिन्दगी बदल गयी। उसने मेहनत और ईमानदारी से पढ़ाई की और आगे चलकर एक बड़ी अधिकारी बनी। जब उससे कभी पूछा जाता कि, "वह इतनी ऊँचाइयों तक कैसे पहुँची?" वह मुस्कुराकर कहती कि, "सिर्फ दो चीजों... मेहनत और ईमानदारी से।"
#संस्कार_सन्देश -
इस कहानी से यह शिक्षा मिलती है कि परिस्थिति चाहे कैसी भी हों परन्तु ईमानदारी हमेशा अच्छा फल देती है।
कहानीकार-
#देवेश्वरी_सेमवाल (स०अ०)
रा० उ० प्रा० वि० कान्दी
क्षेत्र-अगस्त्यमुनि, रुद्रप्रयाग
✏️संकलन
📝टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद
#दैनिक_नैतिक_प्रभात
Comments
Post a Comment