हमारे गुरु
गुरु की महिमा है अपरंपार,
नहीं होता हमारा गुरु बिन
उद्धार।
किस-किस को हम अपना
गुरु मानें,
आओ करें थोड़ा सोच
विचार।।
प्रथम गुरु हमारे मात पिता
कहलाते,
उँगली पकड़ कर वो
हमारी।
इस संसार में चलना हैं
सिखाते।।
द्वितीय गुरु हमारे शिक्षक
हैं,
जिनसे हम अक्षर ज्ञान हैं
पाते।
निर्देशन में हम जिनके
चलकर,
सीढ़ी सफलता की हैं चढ़ते
जाते।।
तृतीय गुरु हमारी आस्था,
में हैं पाए जाते।
जिनसे धर्म- कर्म की राह
जानकर,
अपना जीवन हम सफल
बनाते।।
अच्छी बात जिनसे
सीखें हम,
वह होते हैं हमारे गुरु सम।
है हृदय तल से मेरे इन
सभी गुरुओं को,
करबद्ध कोटि - कोटि नमन।।
रचयिता
अर्चना शर्मा,
सहायक अध्यापक,
कंपोजिट विद्यालय सुरेहरा,
विकास खण्ड-एत्मादपुर,
जनपद-आगरा।

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