108/2025, बाल कहानी- 22 जुलाई
बाल कहानी - हरेला
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संजना दादी के साथ बातचीत कर रही थी। दादी इसे अनेकों प्रसंग सुना करके रोचक और ज्ञानवर्धक कहानी सुना रही थी। सहसा उसे याद आया कि कल हरेला है, जिसके लिए विद्यालय में पौधे लेकर जाना है। संजना बोली, "दादी! हमें पौध कहाँ मिलेगी?"
दादी ने कहा, "इस बार मैंने कई बीज बोये हैं। चलो, बगीचे में जाकर देखते हैं।"
वह दादी के साथ बगीचे में गयी और छोटी-छोटी पौध ढूँढने लगी। दादी ने कहा, "इधर साग-सब्जी लगी हैं, फलों के बीज मैंने उधर बोये हैं। देखते हैं कितने उगे?
संजना बोली, "दादी! हमारी कक्षा में तीस बच्चे हैं। क्या सबके लिए पौध मिल जाएगी?
यह सुनकर दादी ने कहा, "इतने सारे! तो तुम्हें वन विभाग की नर्सरी में मिल जाएँगे। तुम लोगों को वहाँ जाना पड़ेगा। तुमको पेड़-पौधों की और कई प्रजातियाँ मिलेंगी।"
दोनों बगीचे में घूमते रहे, फिर उन्हें वहाँ पर सन्तरे, नारंगी, नींबू, अखरोट और अमरूद के बहुत सारे नये पौधे मिल गये थे।
उनमें से दादी ने प्रत्येक फल का एक-एक पौधा उसे देते हुए कहा कि, "जो भी इस पौधे को लगायेगा, वह रक्षक बनकर उसे अपना पौधा बनायेगा। उसकी देख-रेख करेगा।"
संजना बोली, "दादी! ऐसा ही तो अपूर्व अनुभव पाठ में है, जहाँ तोमोए के एक विद्यालय में सारे बच्चे एक-एक पेड़ को अपनाते हैं और उस पर बैठकर अपनी शैक्षिक गतिविधि को करते हैं।"
दादी ने कहा, "यह तो बड़ी अच्छी बात है। पहले समय में पेड़ लगाना पुण्य का काम माना जाता था। इसीलिए हरी-भरी लहरातीं फसलों के बीच में फलों से लदी हुई मेलू की टहनी लगा दी जाती थी और भगवान से कामना करते थे कि जिस प्रकार से यह मेलू का रय्या फलों से भरा है, वैसे ही हमारे खेत में जो भी फसल हो वह चार गुनी, पाँच गुनी, इसी तरह से भरपूर हो। इस संकल्प के साथ रय्या रोपते थे। बरसात में मिट्टी का कटाव रोकने के उद्देश्य से सभी अपने खेतों की मेंड पर छोटे-छोटे फलदार या चारापाती के पेड़ भी लगाते थे।"
संजना दादी की बात सुनकर बोली "दादी! क्या यह आन्दोलन नया नहीं है?
दादी बोली, "नहीं..पुराणों में भी एक वृक्ष को दस पुत्रों के समान बताया गया है। पेड़ तो हमारे लिए रक्षक की तरह खड़े होते हैं। अर्थात निश्चित है कि जीवन के लिए कहीं ना कहीं पेड़ों की उपयोगिता अत्यधिक है। यह कहकर हमें वृक्षारोपण की भी सीख के लिए प्रेरित किया गया है।"
संजना बोली, "यह तो आपने बड़ी अच्छी बात बतायी। हम भी बहुत प्यार से वृक्षारोपण करेंगे और अपने-अपने लगे पौध की देखभाल करेंगे।" दोनों पौधों की पोटली लेकर के घर की तरफ चले आते हैं।
#संस्कार_सन्देश -
स्वास्थ्य एवं स्वच्छ वातावरण के लिए वृक्षारोपण आवश्यक है।
कहानीकार-
श्रीमती #सरोज_डिमरी (स०अ०)
रा० उ० प्रा० वि० घतोड़ा
कर्णप्रयाग, चमोली (उत्तराखण्ड)
✏️संकलन
📝टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद
#दैनिक_नैतिक_प्रभात
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